अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को छिड़े युद्ध को आज (14 मार्च) को 15वां दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी भी जंग थमती हुई नजर नहीं आ रही है. दोनों ओर से एक दूसरे के ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है. हाल में यूएस ने ईरान के खर्ग द्वीप को निशाना बनाया था, हालांकि यहां पर मौजूद ऊर्जा संयंत्रों को चेतावनी देते हुए छोड़ दिया था. यह छोटा सा द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. कहा जाता है कि इस द्वीप की सुरक्षा या तबाह होना ही इस बात को तय करेगा कि युद्ध हफ्तों में सिमटेगा या सालों खिचेंगा.
खर्ग द्वीप कहां है और ईरान के लिए क्यों अहम?
ईरान के तेल नेटवर्क की खर्ग द्वीप अहम कड़ी है. इसकी ईरान तट से दूरी करीब 16 किलोमीटर और होर्मुज ऑफ स्ट्रेट से करीब 483 किलोमीटर है. यहीं पर मौजूद मेन टर्मिनल से देश के तेल निर्यात का प्रबंधन होता है. ईरान का करीब 90 फीसदी तेल शिपमेंट इसी टर्मिनल से होता है. इस द्वीप पर तेल भंडारण का पर्याप्त स्टोरेज है. यहां से पाइपलाइनें समुद्र के रास्ते ईरान के बड़े तेल और गैस क्षेत्रों से जुड़ी हैं.
खर्ग पर अटैक से ईरान पर क्या असर?
ये द्वीप ईरान के तेल नेटवर्क में एक अहम भूमिका निभाता है. अगर खर्ग द्वीप सुरक्षित रहता है तो ईरान के पास युद्ध को लंबा खींचने के लिए पर्याप्त संसाधन बने रहेंगे. तेल बिक्री से होने वाली इनकम से ईरान को हथियारों की आपूर्ति और घरेलू स्थिरता को बनाए रखने में मदद मिलेगी. साथ ही सप्लाई जारी रहने से ईरान के पास वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित करने का कार्ड रहेगा, जिससे वह कूटनीतिक सौदेबाजी कर सकता है. ईरान ने 1980 के दशक के युद्ध के दौरान भी भारी नुकसान के बावजूद यहां से निर्यात बहाल करने की क्षमता दिखाई थी.
युद्ध जल्द खत्म कैसे हो सकता?
वहीं, युद्ध लंबा नहीं खिंचने के विरोध में यह तर्क दिया जाता है कि अगर यह द्वीप नष्ट हो गया तो ईरान को बड़ा झटका लगेगा. उसकी तेल से होने वाली इनकम बहुत कम हो सकती है. उसके पास वैकल्पिक टर्मिनल सीमित हैं यानी अन्य बंदरगाहों की क्षमता कम है. इसके अलावा तेल निर्यात रुकने से आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिससे युद्ध को लंबा खींचना ईरान के लिए मुश्किल हो सकता है. साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होने पर बड़ी शक्तियां जल्दी युद्ध रोकने का दबाव डाल सकती हैं.
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