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‘अमेरिका दुनिया की एनर्जी मार्केट पर कब्जा…’, ईरान से जंग के बीच रूस का बड़ा दावा, कहा- वो किसी भी हद तक…


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुकी है. इसी बीच रूस ने यूएस पर अपने हितों के लिए किसी भी हद तक जाने का आरोप लगाया. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रूसी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में साफ कहा कि अमेरिका ग्लोबल एनर्जी मार्केट में दबदबा बनाए रखने की पॉलिसी अपना रहा है.

क्या बोले रूसी विदेश मंत्री?

विदेश मंत्री लावरोव ने शनिवार (22 मार्च) को कहा, ‘अमेरिका को केवल अपने हितों की फिक्र है. वह अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है, चाहे वह तख्तापलट हो, अपहरण हो या उन देशों के नेताओं को निशाना बनाना हो, जिनके पास वाशिंगटन के लिए अहम प्राकृतिक संसाधन हैं. यह पूरा मुद्दा तेल से जुड़ा हुआ है.’

अमेरिका पर साधा निशाना

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, लावरोव ने आगे कहा कि अमेरिका का केवल एक सिद्धांत है, उसका खुद का फायदा हमेशा अंतरराष्ट्रीय समझौतों से पहले आता है. अमेरिका ने पहले भी यूरोपीय एनर्जी बाजार में रूस को अलग-थलग किए जाने का स्वागत किया और करता रहेगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रूस के साथ सहयोग करने के लिए अमेरिका को पहले रूस के पक्ष की इज्जत करनी होगी.

‘यूरोपीय नेता रूसी ऊर्जा संसाधन ठुकरा रहे’

शुक्रवार को रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यूरोपीय नेता रूसी ऊर्जा संसाधनों को लगातार ठुकराकर जानबूझकर अपने देशों को संकट और ऊर्जा की कमी की स्थिति में धकेल रहे हैं. मारिया जखारोवा ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक पोस्ट में कहा, यह कोई तकनीकी आपदा या कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है जो यूरोपीय यूनियन में वैश्विक संकट पैदा कर रही है, बल्कि यह उसके अपने नेताओं के फैसले हैं, जो बस हालात बदल रहे हैं.

EU के रुख का कई सदस्य देशों ने किया विरोध

शुक्रवार (20 मार्च) को, यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ईयू के निश्चित रुख की पुष्टि की. यह मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, यूरोप में गंभीर एनर्जी संकट की स्थिति में भी सदस्य देशों को रूसी प्राकृतिक गैस खरीदने से साफ तौर पर रोकता है. हालांकि ईयू के इस रुख का कुछ सदस्य देशों ने विरोध किया था, जो रूस की एनर्जी सप्लाई पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं.

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने इस महीने की शुरुआत में ईयू से रूसी एनर्जी पर लगे बैन को रोकने की अपील की थी और चेतावनी दी कि तेल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में रुकावटें इलाके की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं. 

 



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