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दिल्ली शराब नीति केस में CBI की जांच को बड़ा झटका लगा है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप साबित करने लायक ठोस सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने किन आधारों पर फैसला दिया? क्या सभी मामलों से राहत मिल गई है? और इसका राजनीति पर क्या असर होगा? समझते हैं 6 सवालों में… सवाल-1: शराब घोटाले के मामले में कोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया को किस आधार पर बरी किया? जवाब: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित शराब घोटाले के मामले में केजरीवाल और सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि चार्जशीट में ‘भ्रामक दावे’ किए गए हैं और साबित करने लायक सबूत नहीं हैं…
कोर्ट ने चार्जशीट पर क्या कहा कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल पर क्या कहा कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह पर क्या कहा कोर्ट ने मनीष सिसोदिया पर क्या कहा सवाल-2: कथित शराब घोटाला आखिर है क्या, इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? जवाब: दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को शराब बिक्री से जुड़ी नई आबकारी नीति लागू की थी। इससे शराब दुकानें प्राइवेट हाथों में चली गईं। तब की केजरीवाल सरकार का दावा था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोत्तरी होगी। जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव ने आबकारी नीति में आर्थिक गड़बड़ी को लेकर एक रिपोर्ट उपराज्यपाल वीके सक्सेना को सौंपी थी। मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने CBI जांच की मांग की। 17 अगस्त 2022 को CBI ने केस दर्ज किया। इसमें मनीष सिसोदिया, 3 रिटायर्ड सरकारी अधिकारी, 9 बिजनेसमैन और 2 कंपनियों को आरोपी बनाया गया। विवाद बढ़ता देख 28 जुलाई 2022 को दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर दी। 22 अगस्त 2022 को ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। 28 फरवरी 2023 को दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई। 4 अक्टूबर 2023 को राज्यसभा संजय सिंह को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक ED ने केजरीवाल को 9 समन जारी किए, केजरीवाल एक भी बार नहीं पहुंचे। 21 मार्च 2024 को ED ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। 28 मार्च 2024 को केजरीवाल को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने 15 अप्रैल 2024 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 10 मई 2024 को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें 21 दिन की जमानत मिली। 2 जून को उन्हें फिर दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया। 20 जून 2024 को केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट से तो जमानत मिल गई, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। CBI के मामले में 13 सितंबर 2024 को जमानत मिलने के बाद ही वह जेल से बाहर आ सके। सवाल-3: केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर क्या आरोप लगे थे? जवाब: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर मुख्य रूप से दिल्ली की 2021-22 एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी के चलते आरोप लगे थे। इस नीति को आम आदमी पार्टी की सरकार ने लागू किया था। उन पर ED और CBI ने दो तरह के आरोप लगाए थे…
ED का मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप CBI का भ्रष्टाचार का आरोप सवाल-4: क्या कोर्ट के आदेश के बाद केजरीवाल सभी आरोपों से बरी हो गए? जवाब: कोर्ट ने भ्रष्टाचार और घोटाले के जिस मामले में फैसला दिया है, वो CBI ने अगस्त 2022 में दर्ज किया था। CBI ने 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की और बाद में कई पूरक चार्जशीट भी दाखिल कीं। आज का फैसला केवल CBI वाले मामले में आया है, जिसमें केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपी बरी हो गए हैं। हालांकि इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED अलग से मामला दर्ज करके शराब नीति में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही थी। ED का कहना था कि इस नई शराब नीति में होलसेल बिजनेस ने 12% का कमीशन बुक किया, जिसमें से 6 प्रतिशत आम आदमी पार्टी को दिया गया। ED ने ये भी आरोप लगाया था कि जानबूझकर शराब नीति में ऐसे लूपहोल्स छोड़े गए हैं, ताकि आम आदमी पार्टी को बैकएंड से पैसा मिलता रहे। केजरीवाल पर भी ED ने PMLA यानी पीएमएलए यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इसी मामले में केजरीवाल के अलावा मंत्री मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी जेल में रहना पड़ा। चूंकि, दोनों मामले अलग-अलग दर्ज किए गए हैं, इसलिए इनमें केजरीवाल की गिरफ्तारी भी अलग-अलग हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि ED और CBI दोनों के मामले और ट्रायल अलग-अलग तरीके से चले। दोनों मामले अलग-अलग कानून के तहत अलग-अलग जांच एजेंसियां हैंडल कर रही हैं, इसलिए ये मर्ज नहीं किए जा सकते। CBI के मामले में तो केजरीवाल बरी हो गए हैं, लेकिन ED के मामले में चार्जशीट दायर हो चुकी है और केजरीवाल की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला रिजर्व हो गया है। इस मामले में आगे की सुनवाई में फैसला सुनाया जा सकता है। सवाल-5: क्या CBI कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दे सकती है? जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि CBI इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे सकती है। विराग गुप्ता कहते हैं कि अगर CBI हाई कोर्ट जाती है, तो हाई कोर्ट इस मामले में नए सिरे से सुनवाई शुरू कर सकता है, या फिर राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को बरकरार रख सकता है। सवाल-6: कोर्ट के फैसले से केजरीवाल और AAP की राजनीति पर क्या असर होगा? जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट आदेश रावल के मुताबिक केजरीवाल के दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के पीछे ये केस एक बड़ी वजह था। इससे पहले कोयला घोटाला, 2G स्पेक्ट्रम घोटाला और कामनवेल्थ घोटाले के कारण कांग्रेस चुनाव हारी थी और आज तक उभर नहीं पाई। बाद में किसी को सजा नहीं हुई। इन दोनों घटनाओं से फायदा BJP को हुआ। कोर्ट का फैसला आने के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक होकर रोने लगे। इस दौरान मनीष सिसोदिया उन्हें सहारा देते हुए दिखे। केजरीवाल ने मीडिया से कहा, ‘बीजेपी हमारे ऊपर शराब घोटाले का आरोप लगा रही थी। आज कोर्ट ने हमें बरी कर दिया। हम हमेशा कहते थे कि सत्य की जीत होती है। सत्य की जीत हुई। पीएम मोदी और अमित शाह ने यह सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। आम आदमी पार्टी के टॉप 4 लीडर को जेल में डाल दिया। सिटिंग मुख्यमंत्री को जेल में डाल दिया। 24 घंटे खबरें दिखाई जाती थीं कि केजरीवाल भ्रष्ट है। मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई।’ अब कोर्ट के इस फैसले को आम आदमी पार्टी अपनी जीत की तरह दिखाएगी। हालांकि अभी ED के मामले में फैसला आना बाकी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस फैसले से AAP को राजनीतिक फायदा होगा। 2026 में 5 राज्यों- असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में चुनाव हैं। हालांकि इन राज्यों में AAP की मौजूदगी लगभग नगण्य है। 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव हैं, जहां अभी AAP की सरकार है। दिल्ली में हार के बाद केजरीवाल फिलहाल पंजाब में ज्यादा समय दे रहे हैं। वह पंजाब में भी इस मुद्दे को उठाएंगे और बीजेपी पर राजनीतिक साजिश करके सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करेंगे। कोर्ट के फैसले से INDIA गठबंधन के इस आरोप को भी बल मिलेगा, कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को ED जैसी जांच एजेंसियों के जरिए निशाना बनाती है। यानी शुरुआत में ही ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं दिखा जिससे लगे कि उनके खिलाफ केस बनता है। ——— ये खबर भी पढ़िए… जब बागी हिमंता मिलने पहुंचे, राहुल कुत्ते से खेलते रहे:आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में बीजेपी सरकार; कांग्रेस कैसे उखड़ गई 2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी। आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। पूरी खबर पढ़िए…
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