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खेत तलाई योजना 2025: 90% सब्सिडी पर बनवाएं तालाब, जानिए कब और कैसे मिलेगा पैसा

हर किसान को मिलेगा अपना तालाब! राजस्थान में 25 हजार खेत तलाई बनाने का बड़ा प्लान, जानिए किस जिले में कितने मिलेंगे

किसान भाइयों, अगर आपके खेत में पानी की किल्लत है और सिंचाई के लिए परेशान होते हैं, तो यह खबर सिर्फ आपके लिए है। राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 41 जिलों में 25 हजार खेत तलाई [Farm Pond Subsidy] बनाने का बड़ा ऐलान किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब लॉटरी की पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई है, और पहले आओ-पहले पाओ का नियम लागू हो गया है। मतलब, जितनी जल्दी आवेदन, उतनी जल्दी मिलेगा 90 प्रतिशत तक का अनुदान।

मुख्य बिन्दु

41 जिलों में 25 हजार तालाब

प्रदेश सरकार ने इस बार बजट में 25 हजार फार्म पॉन्ड निर्माण के लिए पूरी राशि दे दी है। हर जिले को लक्ष्य आवंटित किया गया है। यह योजना सिर्फ पानी संरक्षण नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक ताकत बढ़ाने की भी है। एक बार तालाब बन जाए, तो साल भर पानी की समस्या से निजात मिलती है। सूखे की मार झेलने वाले राजस्थान के लिए यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं।

गत वर्षों में जब लॉटरी सिस्टम था, तो हजारों किसान वंचित रह जाते थे। कागजों में नाम आने के बावजूद कई बार पैसे नहीं मिलते थे। अब पहले आओ-पहले पाओ की व्यवस्था ने इन दिक्कतों को खत्म कर दिया है। जो किसान पहले आवेदन करेगा और दस्तावेज पूरे होंगे, उसे प्राथमिकता मिलेगी।

जिलेवार बंटवारा: कहां मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ?

जिलों के हिसाब से लक्ष्य देखें, तो जयपुर सबसे आगे है। यहां 3244 तालाब बनेंगे। इसके बाद नागौर में 2618, सीकर में 2207 और डीडवाना-कुचामन में 1971 फार्म पॉन्ड तैयार होंगे। इन चार जिलों में सर्वाधिक 10,040 तालाब बनने हैं, जो कुल लक्ष्य का 40 प्रतिशत से ज्यादा है। यह आंकड़ा दिखाता है कि सरकार ने पानी की सबसे ज्यादा किल्लत वाले इलाकों को फोकस किया है।

दूसरी ओर, कई जिलों में लक्ष्य काम रखा गया है। कोटा में 121, दौसा में 520, बीकानेर में 108, श्रीगंगानगर में 60, डीग में 55, सिरोही में 74, खैराथल-तिजारा में 86, भरतपुर में 82, बूंदी में 58 तालाब बनेंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां जल स्तर कम ऊंचाई पर है या नहरी पानी से सिंचाई होती है। जरूरत के हिसाब से ही लक्ष्य तय किया गया है, जिससे पैसे का बेजा इस्तेमाल न हो।

अन्य जिलों की बात करें तो जोधपुर में 813, फलोदी में 830, जालोर में 915, बाड़मेर में 1157, जैसलमेर में 1167, टोंक में 1110, अजमेर में 1258, चूरू में 1483, पाली में 226, बालोतरा में 580, बांसवाड़ा में 213, झालावाड़ में 357, हनुमानगढ़ में 393, झुंझुनूं में 403, सवाई माधोपुर में 434, अलवर में 236, करौली में 139, ब्यावर में 230 किसानों को लाभ मिलेगा। राजसमंद में 102, उदयपुर में 152, कोटपूतली बहरोड़ में 151, प्रतापगढ़ में 173, सलुम्बर में 168, भीलवाड़ा में 432 तालाब बनेंगे।

अनुदान की संरचना: किसको मिलेगा कितना पैसा?

अनुदान की बात करें, तो एससी-एसटी, लघु और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा है। प्लास्टिक वाले तालाब पर इन्हें लागत का 90 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। मतलब, अगर तालाब की लागत ₹1.50 लाख आती है, तो ₹1.35 लाख सरकार देगी। बाकी ₹15 हजार ही किसान को खर्च करना होगा।

अन्य श्रेणी के किसानों को प्लास्टिक तालाब पर 80 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। अधिकतम सहायता ₹1.20 लाख तय की गई है, जो लागत का 60 प्रतिशत तक है। कच्चे फार्म पॉन्ड की लागत कम आती है। इसमें एससी-एसटी, लघु और सीमांत किसान को लागत का 70 प्रतिशत और सामान्य श्रेणी के किसानों को लागत का 60 प्रतिशत तक मिलेगा। यानी हर वर्ग के किसान को कम से कम आधी लागत से ज्यादा की सहायता तो मिलेगी ही।

आवेदन और भुगतान: कब और कैसे मिलेगा पैसा?

आवेदन प्रक्रिया अब पहले से आसान हुई है। पहले आओ-पहले पाओ की वजह से किसानों को लॉटरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लेकिन एक शर्त सख्ती से लागू होगी – अपूर्ण दस्तावेज और बिना भौतिक निरीक्षण रिपोर्ट के अनुदान नहीं दिया जाएगा। इसलिए आवेदन करते समय सभी कागजात पूरे रखना जरूरी है।

भुगतान की टाइमिंग भी अहम है। सरकार के दो साल पूरे होने पर इन 25 हजार किसानों को खेत तलाई योजना के तहत मिलने वाले अनुदान को सीधे ट्रांसफर किया जाएगा। यानी तालाब बनने के बाद दस्तावेजों की जांच और भौतिक निरीक्षण के बाद ही राशि खाते में आएगी। यह प्रक्रिया पारदर्शिता बनाए रखती है और गड़बड़ी की गुंजाइश कम करती है।

किसानों के लिए यह मौका क्यों है खास?

यह योजना सिर्फ सिंचाई की समस्या खत्म करने की नहीं, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की भी है। तालाब बनने से वर्षा का पानी सहेजा जा सकेगा, जमीन का जलस्तर बढ़ेगा और जानवरों के लिए भी पानी मिलेगा। प्लास्टिक तालाब होने से पानी के वाष्पीकरण की समस्या भी कम होगी। राजस्थान जैसे रेगिस्तानी राज्य में यह योजना किसानों की किस्मत बदल सकती है।

सरकार की कोशिश है कि हर खेत तक पानी पहुंचे और किसानों की आय दोगुनी हो। इसके लिए सब्सिडी की राशि बढ़ाई गई है और प्रक्रिया सरल की गई है। अब बारी किसानों की है कि वे समय पर आवेदन करें और पूरे दस्तावेज जमा करें। कोशिश करें कि जल्द से जल्द आवेदन करें, क्योंकि लक्ष्य सीमित है और मांग बहुत ज्यादा होगी।

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