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‘जल्द ही चुकानी पड़ेगी कीमत’, लारिजानी की हत्या पर मोजतबा खामेनेई का बयान, इजरायल-US को दी चेतावनी


ईरानी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारिजानी की मौत पर सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई ने इजरायल और अमेरिका को चेतावनी दी है. उन्होंने बयान जारी कर लारिजानी की मौत पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनके हत्यारों को जल्द ही इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इससे पहले पुष्टि की थी कि उसके सचिव अली लारिजानी एक हमले में मारे गए हैं. 

ईरान-अमेरिका को सुप्रीम लीडर की चेतावनी

मोज्तबा खामेनेई ने कहा, ‘अली लारिजानी, उनके बेटे और कई सहयोगियों की शहादत की दुखद खबर सुनकर मुझे गहरा दुख हुआ. वह काफी अनुभवी व्यक्ति थे, जिन्होंने दशकों तक राजनीतिक, सुरक्षा संबंधित क्षेत्रों में ईरान की सेवा की. इस तरह के आतंकी कृत्य दुश्मनों की शत्रुता को ही दर्शाते हैं और इस्लामी राष्ट्र ईरान के संकल्प को और मजबूत करेंगे. निःसंदेह न्याय जरूर मिलेगा.’

पिछले महीने शुरू हुए इस जंग में इजरायल और अमेरिका लगातार ईरान के टॉप लीडरशिप को निशाना बना रहा है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 18 मार्च को पुष्टि की है कि उनके इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब मारे गए हैं. इससे पहले इजरायल ने कहा था कि बीती रात हवाई हमलों में खातिब मारे गए थे. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर इस्माइल खातिब, अली लारिजानी और  नासिरजादेह की हत्या को कायराना बताया.

ईरान के प्रमुख परमाणु वार्ताकार थे लारिजानी

ईरान की राजनीति में सबसे प्रभावशाली शख्स लारिजानी की हत्या के बाद तेहरान में निर्णय लेने की प्रक्रिया उलझ गई है और जंग के जारी रहने के साथ उसके विकल्प सीमित हो गए हैं. पश्चिमी देशों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ी चिंता के बाद लारिजानी ने 2005 में देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा पद को संभाला, जिससे वे देश के प्रमुख परमाणु वार्ताकार बन गए.

सिर्फ मिडिल-ईस्ट तक सीमित नहीं रही जंग

युद्ध के 19वें दिन भी आंकड़े अमेरिका-इजरायल के पक्ष में हैं और भी ईरानी अधिकारी मारे गए हैं. इजरायल का कहना है कि उसने ईरान की सुरक्षा संरचना में सेंध लगा दी है. यह युद्ध अब केवल ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल का हवाई अभियान नहीं रह गया है. यह अब एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव है, जो लेबनान, खाड़ी देशों, ग्लोबल शिपिंग और एनर्जी मार्केट को प्रभावित कर रहा है.

अब मुद्दा ये नहीं है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान को गंभीर क्षति पहुंचाई है या नहीं. अब सवाल ये है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस सैन्य प्रभुत्व को एक ऐसे राजनीतिक परिणाम में बदल सकते हैं जो जीत जैसा लगे या ईरान युद्ध को ट्रंप की उम्मीदों से अधिक लंबा और खर्चीला बनाने में सफल रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत शीर्ष नेतृत्व को पहले ही दिन पूरी तरह से खत्म कर दिया गया था. तब से अमेरिकी-इजरायली सेनाओं ने कई अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य हस्तियों को भी मार गिराया है.

कहां कमजोर पड़ रहे ट्रंप?

इजरायल और अमेरिका ने ईरानी सैन्य बुनियादी ढांचे को कमजोर कर दिया है, आंतरिक सुरक्षा बलों को निशाना बनाया है और तेहरान को डिफेंसिव मोड में धकेल दिया है. हालांकि युद्धों का मूल्यांकन केवल मृतकों की संख्या, नष्ट हुए एयर डिफेंस सिस्टम या कमान बंकरों के आधार पर नहीं किया जाता. इसका मूल्यांकन आर्थिक नुकसान, गठबंधन की एकजुटता और शांति की शर्तों को निर्धारित करने की क्षमता के आधार पर भी किया जाता है. यहीं पर ट्रंप की स्थिति अधिक कमजोर नजर आती है.



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