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‘हमारा दुश्मन हिंदू महिलाओं को फौज में भर्ती कर रहा है। मैं भी उनके खिलाफ लड़ने के लिए महिला जिहादियों को तैयार कर रहा हूं। जमात-उल-मोमिनात की हर जिहादी को मौत के बाद सीधे जन्नत में जगह मिलेगी। उम्मीद है कि जैश-ए-मोहम्मद के मर्द लड़ाके इस नई यूनिट के साथ खड़े होंगे।’ जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर 2025 को पहली बार आतंकियों की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का ऐलान किया था। इसके ठीक 31 दिन बाद 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। 15 लोग मारे गए। NIA ने ब्लास्ट को जैश-ए-मोहम्मद के ‘वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का हिस्सा बताया। अब संयुक्त राष्ट्र की UNSC 1267 सैंक्शंस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ब्लास्ट की साजिश जैश ने ही रची थी। इसकी साजिश में जमात-उल-मोमिनात को भी शामिल किया गया था। UNSC की 10 पेज की रिपोर्ट, 95वें पॉइंट में दिल्ली ब्लास्ट का जिक्र
दैनिक भास्कर के पास UNSC की रिपोर्ट है। 4 फरवरी को जारी इस रिपोर्ट में 22 अप्रैल, 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी जिक्र है। रिपोर्ट जारी करने वाली कमेटी जैश, ISIS और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों पर नजर रखती है। 95वें पॉइंट में लिखा है कि 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में जैश कमांडर मसूद अजहर भारत में ऐसे कई हमलों की प्लानिंग कर रहा है। इसमें जैश की महिला ब्रिगेड जमात-उल-मोमिनात को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकी मारे जा चुके हैं। आगे पढ़िए, कैसे बनी महिला आतंकियों की नई यूनिट
पहलगाम से करीब 5 किमी दूर बायसरन घाटी में आतंकियों ने 26 लोगों को मार डाला था। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें जैश कमांडर मसूद अजहर के परिवार के यूसुफ अजहर, जमील अहमद, हमजा जमील और हुजैफा अजहर समेत 14 लोग मारे गए। इसके बाद मसूद अजहर की एक ऑडियो क्लिप सामने आई थी, जिसमें उसने कहा था कि मेरी बड़ी बहन अबबा बीबी भी हमले में मारी गईं। मैं उनके साथ मिलकर एक महिला ब्रिगेड बनाना चाहता था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत से बदला लेने के लिए आतंकी संगठन जैश का चीफ मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल सैफ ने महिला आतंकियों की भर्ती शुरू की है। इन लड़कियों में ज्यादातर बहावलपुर, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरिपुर और मंसेहरा के मदसरों में पढ़ती हैं। भारत में जमात-उल-मोमिनात का नेटवर्क बढ़ाने और स्लीपर सेल को मजबूत करने का काम सादिया अजहर और अफीरा बीबी को सौंपा गया। सादिया अजहर मसूद अजहर की बहन है। वही जमात-उल-मोमिनात की सबसे बड़ी लीडर है। सादिया का पति यूसुफ अजहर ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था। संगठन में कमांडर की हैसियत रखने वाली अफीरा बीबी मसूद अजहर के भतीजे उमर फारुख की पत्नी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश ने बदले नियम
NIA से जुड़े एक सीनियर अधिकारी कहते हैं, ‘भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर और आतंकी ढांचे बर्बाद कर दिए थे। ये कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थी, जिसकी ब्रीफिंग कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने की थी।’ ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाया मसूद अजहर लगातार भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें रच रहा है। भारत की फौज में महिला ऑफिसर्स को देखकर उसने जैश की महिला ब्रिगेड शुरू करने का फैसला लिया। ‘जमात-उल-मोमिनात बनने के बाद लाल किले के पास ब्लास्ट हुआ। NIA ने इस मामले में लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला है कि वह जमात-उल-मोमिनात की कमांडर अफीरा बीबी के कॉन्टैक्ट में थी। उसी ने शाहीन को भारत में महिलाओं को आतंकी ब्रिगेड में शामिल कर फिदायीन बनाने का काम सौंपा था।’ NIA को दिल्ली कार ब्लास्ट केस में जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद के शामिल होने लिंक मिले हैं। इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की डॉक्टर शाहीन सईद सहित डॉ. आदिल और डॉ. मुजम्मिल शकील शामिल हैं। ये भी जैश के नेटवर्क से लगातार संपर्क में थे। यूनाइटेड स्टेट इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के फाउंडर रॉबिन सचदेवा कहते हैं, ‘जैश का इतिहास देखें, तो ये संगठन अब तक महिलाओं को सीक्रेट ऑपरेशन और फिदायीन हमलों में शामिल नहीं करता था। इसकी बजाय उन्हें लोकल सपोर्ट सिस्टम, मैसेज-इंफॉर्मेशन कैरियर और लॉजिस्टिक मैनेजमैंट का काम दिया जाता था।’ ‘पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद संगठन ने रुख बदला है। बीते एक साल में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें महिला फिदायीन के नाम सामने आए हैं।’ ‘महिलाओं की आतंकी यूनिट, भारत के लिए खतरे की घंटी’
रॉबिन सचदेवा आगे कहते हैं, ‘आतंकी मसूद अजहर ने हाल के दिनों में न सिर्फ खुले तौर पर महिलाओं का आतंकी नेटवर्क बनाया, बल्कि इसका ऐलान भी किया। जमात-उल-मोमिनात ग्रुप भी इसी का हिस्सा है। इसमें बकायदा महिला आतंकियों को कमांडर और कैप्टन जैसी पोस्ट दी गई हैं। इनका मकसद पाकिस्तान सहित भारत की पढ़ी-लिखी भारतीय महिलाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी संगठन में भर्ती करना है। ये भारत के लिए खतरे की घंटी है।’ रॉबिन कहते हैें, ‘दुनियाभर में देखें तो अब तक श्रीलंका में लिट्टे को ही एक्टिव वुमेन टेरर ग्रुप्स बनाने के लिए जाना जाता रहा है। लिट्टे ने सबसे पहले महिलाओं को संगठन में शामिल किया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या जैसी खौफनाक घटना की। धीरे-धीरे उनकी आइडियोलॉजी को बोको-हराम और ISIS जैसे आतंकी संगठनों ने फॉलो किया। इसी लिस्ट में अब जैश की आतंकी यूनिट जमात-उल-मोमिनात का नाम जुड़ गया है।’ दिल्ली ब्लास्ट का जमात-उल-मोमिनात से लिंक कितना खतरनाक
जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद्य बताते हैं, ‘दिल्ली ब्लास्ट की जांच में NIA ने जिस सच से पर्दा उठाया है, वो होश उड़ाने के लिए काफी है। अब हमारा सामना सिर्फ मदरसों या गांवों से कट्टरपंथी बनकर आए युवाओं से नहीं है। जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी स्ट्रैटजी को ISIS के लेवल पर अपग्रेड कर लिया है। ये अब वॉइट कॉलर टेररिज्म बन चुका है।’ ‘जैश का नया डॉक्टर मॉड्यूल, हमारी नाक के नीचे कश्मीर से निकलकर लखनऊ और हरियाणा तक फैल गया। ये इस बात का सबूत है कि अब टारगेट पर पढ़े-लिखे और अच्छा सैलरी पैकेज उठाने वाले लोग हैं। उन्हें इंक्रिपटेड ऑनलाइन चैनल्स के जरिए ब्रेनवॉश कर आतंकी बनाया जा रहा है।’ एसपी वैद्य के मुताबिक, दिल्ली ब्लास्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम डॉ. शाहीन सईद का है। वह मास्टरमाइंड डॉ. आदिल और मुजम्मिल शकील के साथ मिलकर साजिश रच रही थी। इससे जाहिर होता है कि पढ़ी-लिखी महिलाओं में कट्टरपंथ का जहर कितनी गहराई तक जा चुका है। जमात-ए-मोमिनात जम्मू-कश्मीर, यूपी और साउथ के राज्यों में एक्टिव
भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं, ‘2019 में हुए पुलवामा अटैक के बाद सुरक्षाबलों ने जैश के आधे से ज्यादा कमांडरों को मार गिराया। ऑपरेशन सिंदूर में भी सेना ने जैश के हेडक्वार्टर समेत बहावलपुर में एक मदरसे को निशाना बनाया, जहां कई आतंकी पनाह लिए हुए थे। ये सब देखकर मसूद अजहर को महिलाओं को मोर्चे पर लाने के लिए मजबूर होना पड़ा।’ ‘जमात-उल-मोमिनात जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए एक्टिव हो रहा है। टेलीग्राम, स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म, VPN और वॉट्सएप ग्रुप्स नेटवर्क के जरिए इस ग्रुप की गतिविधियां फैल रही हैं।’ बड़े मंदिर लश्कर की हिट लिस्ट में, सिक्योरिटी बढ़ाई
10 नवंबर को हुए कार धमाके के बाद दिल्ली एक बार फिर हाई अलर्ट पर है। खुफिया एजेंसियों से मिले आतंकी हमले के इनपुट के बाद सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है। लाल किले के आसपास ब्लास्ट के खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने भारत के बड़े धार्मिक स्थलों को हिट लिस्ट में रखा है। सोर्स बताते हैं कि दिल्ली में चांदनी चौक का मंदिर भी आतंकियों के टारगेट पर है। खुफिया एजेंसियों ने इनपुट दिया है कि लश्कर-ए-तैयबा IED ब्लास्ट की कोशिश कर सकता है। आतंकी पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक मस्जिद में 6 फरवरी को हुए विस्फोट का बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं। …………………………….
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