
तमिलनाडु में अप्रैल 2026 को होने वाले विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच सिनेमा जगत और राजनीति का टकराव तेज हो गया है। बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर 2: द रिवेंज' अब कानूनी रस्साकशी के केंद्र में है। 'धुरंधर 2' को विधानसभा चुनाव होने तक बैन करने की मांग की जा रही है।
मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर तमिलनाडु राज्य में फिल्म की रिलीज और प्रदर्शन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है। कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ के समक्ष एक वकील ने मौखिक रूप से फिल्म का मुद्दा उठाया।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि फिल्म का कथानक गहरे राजनीतिक मुद्दों और वास्तविक घटनाओं (जैसे 26/11 हमले और कराची के गैंग वॉर) पर आधारित है। चूंकि राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है, ऐसे में दलील दी गई है कि यह फिल्म मतदाताओं के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक उल्लेख के आधार पर आदेश नहीं दिया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को औपचारिक रिट याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद ही इस पर तत्काल सुनवाई संभव होगी।
सिर्फ रणवीर सिंह ही नहीं, बल्कि तमिल सुपरस्टार और 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के नेता विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' भी सेंसर बोर्ड के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को सीधे भारत निर्वाचन आयोग के पास समीक्षा के लिए भेज दिया है।
यह संभवतः पहली बार है जब किसी फिल्म के कंटेंट को चुनाव आयोग द्वारा परखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि चूंकि विजय खुद एक सक्रिय राजनेता हैं और चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए फिल्म की रिलीज चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन हो सकती है।
आदित्य धर के निर्देशन में 'धुरंधर 2' बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान रच रही है। फिल्म की कहानी जसकीरत सिंह रंगी के हमजा अली मजारी बनने के सफर को दिखाती है, जो कराची के लयारी इलाके में अंडरवर्ल्ड पर राज करता है। फिल्म में वास्तविक घटनाओं जैसे कंधार विमान अपहरण, संसद हमला और 26/11 के संदर्भों को काल्पनिक कहानी के साथ पिरोया गया है।


