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फीमेल डायरेक्टर्स जिनका फिल्मों में है दबदबा, कोई ऑस्कर रेस में हुआ शामिल, किसी ने 2 बार झटका था नेशनल अवॉर्ड

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बॉलीवुड में डायरेक्टर्स का जिक्र होने से लोगों के दिमाग में पुरुषों की छवि आती है, लेकिन हिंदी सिनेमा की दुनिया में कई ऐसी महिलाएं हैं जो अपनी फिल्मों के जरिए अलग छाप छोड़ रही हैं. आज इंटरनेशनल वुमेंस डे के मौके पर उन महिलाओं की बात करते हैं जिन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए न सिर्फ मजबूत कहानियां कही बल्कि बॉक्स-ऑफिस पर भी शानदार सफलता हासिल की.

नई दिल्ली. बॉक्स-ऑफिस पर तहलका मचाने से लेकर दिल छू जाने तक महिला डायरेक्टर्स की हर फिल्म को देखो तो ऐसा लगता है कि मानों ये कहानियां सीधे दिल से निकली हैं. पिछले साल महिला डायरेक्टर किरण राव की फिल्म ‘लापता लेडीज’ भारत की तरफ से ऑस्कर की ऑफिशियल एंट्री थी. फिल्म ये अवॉर्ड जीतने में भले ही चूक गई हो, लेकिन इसने दर्शकों का दिल बखूबी जीत लिया था.

बॉलीवुड में कई महिला निर्देशक न केवल मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं, बल्कि अपनी फिल्मों के जरिए समाज के अहम मुद्दों को भी सामने ला रही हैं. उनकी संवेदनशील सोच, साहसिक दृष्टिकोण और रचनात्मकता ने यह साबित कर दिया है कि सफल फिल्मों के पीछे महिलाओं की भूमिका अब सिर्फ सहयोग तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व का भी है.

इनमें सबसे प्रमुख नामों में से एक रीमा कागती हैं. उन्होंने साल 2007 में मल्टीस्टारर फिल्म ‘हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड’ से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा. यह फिल्म अपने अनोखे अंदाज और हल्के-फुल्के अंदाज के कारण दर्शकों को पसंद आई.

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रीमा कागती की सबसे अहम फिल्मों में साल 2012 में आई आमिर खान और रानी मुखर्जी अभिनीत फिल्म ‘तलाश’ है. इस फिल्म को दर्शकों के साथ ही क्रिटिक्स ने भी खूब सराहा था. ये क्रिटिकली अक्लेम्ड फिल्मों में शामिल थी. इसके अलावा साल 2018 में रीमा ने अक्षय कुमार और मौनी रॉय स्टारर गोल्ड का निर्देशन किया था. इस फिल्म को भी काफी पसंद किया गया था.

अब बात करते हैं जोया अख्तर की. फिल्मी परिवार में पली-बढ़ी जोया की हमेशा से फिल्मों में दिलचस्पी रही है. उन्होंने अपने बैनर टाइगर बेबी फिल्म्स की स्थापना की जिसके तहत उन्होंने अपनी वेब सीरीज दहाड़ का निर्देशन किया. जोया ने लक बाय चांस से बतौर निर्देशक अपने करियर की शुरुआत की थी.

लक बाय चांस के लिए सराहना हासिल करने के बाद जोया अख्तर ने जिंदगी न मिलेगी दोबारा, दिल धड़कने दो, गली बॉय और द आर्चीज का निर्देशन किया. उनकी फिल्म गली बॉय को क्रिटिक्स द्वारा काफी सराहा गया था. इस फिल्म ने कई अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए.

इसी तरह किरण राव भी बतौर निर्देशक और लेखक अपनी खास पहचान बना चुकी हैं. उन्होंने 2011 में फिल्म ‘धोबी घाट’ के जरिए निर्देशन की शुरुआत की. यह फिल्म मुंबई शहर की जटिलताओं और वहां के अलग-अलग जीवन को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है.

इसके बाद उनकी फिल्म ‘लापता लेडीज’ ने काफी चर्चा बटोरी. ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म दो दुल्हनों की अदला-बदली की कहानी के जरिए महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सोच पर सवाल उठाती है. इस फिल्म को इतना सराहा गया कि इसे एकेडमी अवॉर्ड्स के 97वें संस्करण के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर चुना गया था.

मेघना गुलजार ने भी अपने निर्देशन से कई प्रभावशाली फिल्में दी हैं. मशहूर गीतकार गुलजार की बेटी मेघना ने 2015 में नोएडा डबल मर्डर केस पर आधारित फिल्म ‘तलवार’ का निर्देशन किया, जिसे काफी सराहना मिली. इसके बाद 2018 में उनकी फिल्म ‘राजी’ आई, जिसमें आलिया भट्ट और विक्की कौशल मुख्य भूमिकाओं में थे. यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, बल्कि मेघना को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी दिलाया.

उन्होंने 2020 में एसिड अटैक सर्वाइवर की कहानी पर आधारित फिल्म ‘छपाक’ बनाई, जिसमें दीपिका पादुकोण ने मुख्य भूमिका निभाई. इसके बाद 2023 में उनकी फिल्म ‘सैम बहादुर’ रिलीज हुई, जिसमें विक्की कौशल ने फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का किरदार निभाया. समय के साथ मेघना गुलजार ने खुदको एक ऐसी निर्देशक के तौर पर स्थापित किया जो सेंसेटिव फिल्मों के लिए जानी जाती हैं. (ians इनपुट के साथ)

यह अपर्णा सेन की पहली निर्देशित फिल्म थी और इसे जबरदस्त सराहना मिली. फिल्म एक अकेली एंग्लो-इंडियन शिक्षिका की कहानी है, जो कोलकाता में बदलते समय के बीच अपनी पहचान और रिश्तों की तलाश करती है. इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवॉर्ड मिला और इसे भारतीय समानांतर सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है. ‘मिस्टर मिसेज अय्यर’ यह फिल्म साम्प्रदायिक तनाव की पृष्ठभूमि पर आधारित है और दो अजनबियों की कहानी दिखाती है, जो मुश्किल हालात में एक-दूसरे की मदद करते हैं. फिल्म में कोंकणा सेन शर्मा और राहुल बोस मुख्य भूमिकाओं में थे. इस फिल्म को राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जबकि कोंकणा सेन शर्मा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नेशनल अवॉर्ड मिला था.

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