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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चल रहे हर कन्फ्यूजन का Full Solution Explained


अमेरिका से हुई ट्रेड डील के बाद विपक्ष सत्ता पक्ष पर भड़का हुआ है और सत्ता पक्ष विपक्ष पर. विपक्ष कह रहा है कि भारत के किसानों को नुकसान हुआ तो सरकार कह रही है कि भारत को फायदा ही फायदा है. कुल मिलाकर इस ट्रेड डील पर कंफ्यूजन इतना है कि तय ही नहीं हो पा रहा है कि इस ट्रेड डील से सच में फायदा है या फिर भारत के किसानों का नुकसान है. तो चलिए आज के क्लियर कट एपिसोड में इसी कंफ्यूजन को दूर करने की कोशिश करते हैं. और साथ ही ये भी समझने की कोशिश करते हैं कि वाकई ये डील हुई भी है या ये सिर्फ ट्रंप का पोस्ट है, जिसमें अभी लागू सिर्फ घटा हुआ टैरिफ ही है. 

भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील में आखिर है क्या, ये अब तक साफ नहीं हो पाया है, लेकिन कुछ ऐसे पॉइंट्स हैं, जिनपर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद ही अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रूथ सोशल पर साफ-साफ लिखा है. ट्रंप के उन दावों को अभी तक भारत सरकार की ओर से खारिज भी नहीं किया गया है तो समझ यही बनती है कि

  • भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और अपनी तेल की जरूरतों को अमेरिका और वेनेजुएला से पूरी करेगा.
  • भारत अगले पांच साल के दौरान अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदेगा, जिसमें एयरक्राफ्ट, टेक्नॉलजी आइटम्स, कीमती धातुएं, तेल, न्यूक्लियर प्रोडक्ट और खेती से जुड़ा सामान खरीदेगा.

इस पूरी डील में रूस के तेल और खेती की जो बात है, वही इस डील का सबसे कंफ्यूजिंग पॉइंट है क्योंकि सरकार की ओर से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में कहा है कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा, जबकि विपक्ष साफ-साफ कह रहा है कि ये डील किसानों के हित में है ही नहीं और इस डील के लागू होने से भारत के किसान तबाह हो जाएंगे.

किसानों को लेकर अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस का जो बयान आया है, वो बयान विपक्ष की आशंका को सही साबित करता दिख रहा है, क्योंकि ब्रूक रोलिंस ने कहा है कि इस ट्रेड डील से भारत के बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. ब्रूक रोलिंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था. भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और आज का यह समझौता इस घाटे को कम करने में काफी मददगार साबित होगा.’

अमेरिकी कृषि सचिव के इस बयान को भी अभी सरकार की ओर से न तो खारिज किया गया है और न ही इसपर कोई सफाई दी गई है. बस इतना ही कहा जा रहा है कि किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन असल बात सिर्फ इतनी है कि ये डील अभी हुई ही नहीं है. अभी तो बस बात चल रही है और बात सकारात्मक दिशा में है तो अमेरिका ने भारत पर लगा टैरिफ घटा दिया है, जो पहले 25 फीसदी थी और 25 फीसदी की पेनल्टी के साथ ये 50 फीसदी तक हो जाता था, जो अब सिर्फ 18 फीसदी का ही रह गया है और यही एक चीज है जो तत्काल प्रभाव से लागू है. बाकी ये डील अभी तक लागू नहीं है और सरकार की ओर से पीयूष गोयल इसकी सफाई दे चुके हैं.

यही सच भी है क्योंकि अगर डील साइन होती है तो दोनों ही पक्षों के हस्ताक्षर होते हैं. कुछ दस्तावेज होते हैं जो सार्वजनिक किए जाते हैं. कुछ शर्तें होती हैं, जिन्हें दोनों ही देशों के अधिकारियों को अपने-अपने देश की मीडिया को बताना होता है, लेकिन अभी ऐसा कोई दस्तावेज सार्वजनिक हुआ ही नहीं है. इसी दस्तावेज को अंतिम रूप देने के लिए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर भी अमेरिका गए हैं, जहां उनकी मुलाकात ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से हुई है.  ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट से मुलाकात के बाद डॉक्टर जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया है और लिखा है कि-

‘एक व्यापक बातचीत हुई जिसमें हमारे द्विपक्षीय सहयोग के एजेंडे, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों को शामिल किया गया. भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के जिन पहलुओं पर चर्चा की गई, उनमें व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और प्रौद्योगिकी शामिल थे. हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न तंत्रों की जल्द बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी है.’

बाकी तो आशंकाएं हैं और गंभीर आशंकाएं हैं, जिनसे किसानों के हित सीधे जुड़े हुए हैं. जब तक इस डील की डिटेल्स सामने नहीं आतीं, सिर्फ आशंकाओं पर या सिर्फ ट्रंप के पोस्ट पर इस डील का विस्तृत विश्लेषण करना मुनासिब नहीं होगा. तो डील के होने का इंतेजार करते हैं, उसका विस्तृत ब्योरा आने का इंतेजार करते हैं और तब तक सत्ता पक्ष और विपक्ष की जो दलीलें हैं, उन्हें सुनकर अपनी समझ बनाते रहते हैं. 



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