
90 के दशक की शुरुआत में बॉलीवुड के आसमान पर एक ऐसा सितारा चमका, जिसने बेहद कम समय में करोड़ों दिलों पर राज कर लिया। मासूम मुस्कान, चुलबुली आंखें और रूमानी अदाओं से दर्शकों को दीवाना बनाने वाली दिव्या भारती आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
25 फरवरी 1974 को मुंबई में जन्मी दिव्या भारती का फिल्मी सफर भले ही छोटा रहा, लेकिन उनकी लोकप्रियता और प्रभाव आज भी उतना ही गहरा है। दिव्या भारती ने महज 16 साल की उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखा। साल 1990 में रिलीज तेलुगु फिल्म बोबली राजा से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की।
पहली ही फिल्म में उनकी मासूमियत और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों और मेकर्स का ध्यान खींच लिया। साउथ सिनेमा में मिली इस शुरुआती सफलता ने उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे खोल दिए। साल 1992 में दिव्या भारती ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और आते ही छा गईं। राजीव राय निर्देशित फिल्म विश्वात्मा में उनका ग्लैमरस और बोल्ड अवतार दर्शकों को खूब भाया।
इस फिल्म का गाना “सात समंदर पार मैं तेरे पीछे पीछे आ गई” आज भी आइकॉनिक माना जाता है और दिव्या भारती की पहचान बन चुका है। साल 1992 दिव्या भारती के करियर का गोल्डन पीरियड साबित हुआ। इसी साल उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें शोला और शबनम, दिल का क्या कसूर, दीवाना, बलवान और दिल आशना है जैसी हिट और यादगार फिल्में शामिल हैं।
फिल्म दीवाना में उनके अभिनय को जबरदस्त सराहना मिली और इसी फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू अवॉर्ड से नवाजा गया। महज एक साल के भीतर 14 बॉलीवुड फिल्मों में काम करना आज भी एक रिकॉर्ड माना जाता है।
साल 1992 में दिव्या भारती ने मशहूर फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला से शादी कर ली। उनकी शादी ने उस दौर में खूब सुर्खियां बटोरीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 5 अप्रैल 1993 को महज 19 साल की उम्र में दिव्या भारती की बिल्डिंग से गिरने के कारण मौत हो गई। उनकी अचानक और रहस्यमयी मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
दिव्या भारती के निधन के बाद उनकी फिल्में रंग और शतरंज रिलीज हुईं। खासतौर पर फिल्म रंग बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और यह साबित कर दिया कि दिव्या भारती दर्शकों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी।


