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1947 में देश के बंटवारे के साथ बंगाल का भी विभाजन हो गया। भारत को पश्चिम बंगाल मिला और पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में चला गया, जो बाद में बांग्लादेश बना। तब बंगाल का 67% हिस्सा पाकिस्तान को और 37% हिस्सा भारत को मिला। 1952 में पहली बार पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए। 238 में से 150 सीटें कांग्रेस ने जीत ली। सीपीआई वाले लेफ्ट फ्रंट को 41 और जनसंघ वाले राइट ब्लॉक को 13 सीट मिलीं। पीएम जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी के पर्सनल डॉक्टर रहे बिधान चंद्र रॉय मुख्यमंत्री बने। पश्चिम बंगाल में लगातार 20 साल और कुल 25 साल कांग्रेस सरकार में रही, लेकिन 1977 के बाद वो अपना सीएम नहीं बना पाई। अब उसका कोई विधायक भी नहीं है। कभी 39% से ज्यादा वोट शेयर भी सिमटकर 3% से कम हो गया। आखिर पश्चिम बंगाल में सत्ता से दूर कैसे हुई कांग्रेस और आज भी सरकार बनाने की दौड़ से बहुत पीछे क्यों है; इलेक्शन एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… तारीख- 18 अप्रैल 1975, जय प्रकाश नारायण यानी जेपी का काफिला कलकत्ता विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम से गुजर रहा था। जेपी एंबेसेडर कार में थे। अचानक 20 साल की एक लड़की भीड़ से निकली और उनकी कार के बोनट पर चढ़कर नाचने लगी। वो लड़की थीं- ममता बनर्जी। जेपी का काफिला रोककर ममता, रातों-रात इंदिरा की आंखों का तारा बन गईं। 1984 के लोकसभा चुनाव में महज 29 साल की ममता ने दिग्गज वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी को हरा दिया। उसी साल उन्हें प्रदेश युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया। 8 साल बाद यानी 1992 में ममता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में भी उतर गईं। सामने थे कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी के चहेते सोमेन मित्रा। ममता चुनाव हार गईं, लेकिन उनका बढ़ता कद प्रणब मुखर्जी, सोमेन मित्रा, प्रियरंजन दासमुंशी जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताओं को चुभने लगा। आखिरकार ममता को युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। फिर आई तारीख 9 अगस्त 1997, कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था। ममता को इसमें नहीं बुलाया गया। नाराज ममता ने स्टेडियम के बाहर रैली बुला ली। सीनियर जर्नलिस्ट कल्याणी शंकर अपनी किताब ‘Pandora’s Daughters’ में लिखती हैं- ‘सीताराम केसरी ने ममता की रैली रोकने की पूरी कोशिश की। कई नेताओं को मनाने के लिए भेजा, पर ममता अड़ी रहीं। ममता की रैली में हजारों लोग पहुंचे। भीड़ देखकर ममता गदगद दिखीं और उन्होंने एलान किया- हमारी रैली में आने वाले ही असली ग्रासरूट कांग्रेस (तृणमूल कांग्रेस) वर्कर हैं।’ ममता की रैली से घबराए कांग्रेस नेताओं ने आनन-फानन में उनकी सोनिया गांधी से मीटिंग कराई। दिल्ली में आधी रात को ममता, सोनिया से मिलीं। बैठक के बाद ममता ने ऐलान किया- ‘मैं पार्टी से अलग नहीं हो रही हूं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस को तभी भंग करूंगी, जब सोनिया गांधी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगी।’ हालांकि, तब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनीं। आखिरकार ममता बनर्जी का सब्र टूट गया। एक रोज उन्होंने एलान किया- ‘अब मैं सोनिया गांधी या कांग्रेस से बात करने से बहुत नफरत करती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझसे समझौता करने के लिए 9 दिन इंतजार कराया। मुझसे बात करने का वादा किया, लेकिन बात नहीं की। बदले में मुझे क्या मिला? पार्टी से निष्कासन।’ 1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाई और अगले ही चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी बन गईं। कांग्रेस का करीब 30% वोट झपट लिया। उसके बाद कांग्रेस पश्चिम बंगाल में कभी नहीं लौट सकी। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पतन की 3 बुनियादी वजहें हैं… 1. सामाजिक वजह: भद्रलोक बनाम सर्वहारा के संघर्ष ने लेफ्ट का जनाधार बढ़ा दिया 2. राजनीतिक वजह: इंदिरा की केंद्रीकरण नीति और कांग्रेस में दरार 3. आर्थिक वजह: केंद्र की भेदभावपूर्ण नीतियां क्या कांग्रेस के पास पश्चिम बंगाल में वापसी का कोई रोडमैप है? 2021 विधानसभा में कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ गठबंधन किया था। वह 92 सीटों पर लड़ी, लेकिन कोई सीट नहीं जीत पाई। इस बार सभी सीटों पर कांग्रेस अकेले लड़ रही है। सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य बताते हैं… ————————– चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- ‘शूद्र’ महिलाओं से संबंध बनाते थे नंबूदरी ब्राह्मण: नस्ल सुधारने के नाम पर जन्मे बच्चों से दूर रहते, केरलम की राजनीति में कितना असर केरलम का त्रावणकोर इलाका। एक ब्राह्मण पुरुष तैयार होकर नायर बस्ती में जाता है। वहां एक घर के बाहर नहाता है। कपड़े बदलता है। एक अन्य ब्राह्मण उसे खाना परोसता है। फिर वह खाना खाता है। कुछ देर बाद वह घर के बाहर चप्पल उतार कर अंदर चला जाता है, जहां एक महिला उसका इंतजार कर रही होती है। जब महिला का पति लौटता है और उसे घर के बाहर एक आदमी की चप्पल दिखती है, तो बिना कुछ कहे लौट जाता है। क्योंकि वो समझ जाता है कि उसकी पत्नी एक नंबुदरी ब्राह्मण पुरुष के साथ संबंधम में है। ये किस्सा केरलम की दशकों पुरानी परंपरा ‘संबंधम’ का है, जिसमें नंबूदरी ब्राह्मण नायर महिलाओं से शारीरिक संबंध बना सकते थे। जानिए कहानी इसी ‘संबंधम’ परंपरा की…
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