पाकिस्तान में बीते शनिवार (21 मार्च, 2026) को लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की मुरीदके स्थित लश्कर हेडक्वार्टर मरकज तैयबा के बाहर ईद की नमाज के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. एबीपी न्यूज ने सबसे पहले आपको बताया था कि मामला लश्कर-ए-तैयबा में अंदरूनी दुश्मनी और गुटबाजी का प्रतीत हो रहा था. आज इस मामले में एबीपी न्यूज के पास एक और बड़ी एक्सक्लूसिव जानकारी लगी है.
जानकारी के मुताबिक, ईद की नमाज के ठीक बाद लश्कर के अन्य लोगों से मिलकर जैसे ही बिलाल आरिफ सलाफी मरकज तैयबा के ध्वस्त परिसर से निकलकर बाहर परिसर में आया, वैसे ही लश्कर- ए-तैयबा के एक और आतंकी कमांडर गाजी उबैदुल्लाह खान और उसकी पत्नी ने बिलाल को मौत के घाट उतार दिया.
शेखपुरा पुलिस की कैद में हैं दोनों हत्यारे
सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, बिलाल को मारने वाले गाजी उबैदुल्लाह खान और उसकी पत्नी भी मरकज तैयबा के ध्वस्त परिसर में ईद की नमाज पढ़ने आए थे और नमाज के बाद बिलाल को मारने के लिए इंतजार कर रहे थे और बिलाल के आते ही जहां गाजी उबैदुल्लाह खान ने बिलाल को तीन गोली मारी, तो वहीं उबैदुल्लाह की पत्नी ने बिलाल को चाकुओं से गोद दिया. दोनों ही इस समय शेखपुरा की पुलिस की कैद में हैं.
क्या है हत्या के पीछे की पूरी कहानी?
गाजी उबैदुल्लाह खान, उसकी पत्नी और मृतक लश्कर-ए-तैयबा कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी मुरीदके की तैयबा कॉलोनी में रहते हैं, जो घर इन्हें लश्कर-ए-तैयबा ने ही अलॉट किए हैं. साथ ही लश्कर के अन्य बड़े कमांडर जैसे आतंकी जफर इकबाल समेत अन्य बड़े कमांडर भी इसी तैयबा कॉलोनी में रहते हैं. आज से 3-4 साल पहले लश्कर के कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी ने लश्कर ए तैयबा के दूसरे आतंकी गाजी उबैदुल्लाह खान के दामाद की हत्या कर दी थी, लेकिन बिलाल आरिफ सलाफी क्योंकि भारत के वांटेड आतंकी जकी उर रहमान लखवी का खास था, ऐसे में शेखपुरा की पुलिस ने बिलाल को क्लीन चिट दे दी थी और उसे कोई सजा नहीं हुई.
पुलिस ने किन-किन धाराओं में दर्ज की FIR?
इसी वजह से बदले की आग में झुलस रहे गाजी उबैदुल्लाह खान और उसकी पत्नी ने कल शनिवार (21 मार्च, 2026) ईद की नमाज के ठीक बाद लश्कर ए तैयबा के इस बड़े कमांडर और जकी उर रहमान लखवी के खासमखास को मौत के घाट उतार दिया. शेखपुरा पुलिस ने फिलहाल लश्कर कमांडर आरिफ बिलाल सलाफी की हत्या करने वाले गाजी उबैदुल्लाह खान और उसकी पत्नी से पूछताछ कर रहे हैं और दोनों के ऊपर हत्या और माहौल खराब करने की धाराओं में FIR दर्ज की गई है.
1993 से 2003 तक J-K में एक्टिव था गाजी उबैदुल्लाह
सूत्रों के मुताबिक, आतंकी कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की जान लेने वाला सीनियर आतंकी गाजी उबैदुल्लाह खान लश्कर ए तैयबा का पुराना आतंकी था और साल 1993 से 2003 तक भारत के जम्मू कश्मीर में एक्टिव था. बाद में उबैदुल्लाह खान वापस सीमा पार करके पाकिस्तान चला गया और मुरीदके के अंदर आतंकियों को ट्रेनिंग देने लगा.
उबैदुल्लाह खान पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह का रहने वाला था, लेकिन वापस लौटने के बाद ना सिर्फ लश्कर में उसका कद बढ़ा, बल्कि मुरीदके की तैयबा कॉलोनी में रहने के लिए मकान तक दिया गया था. इस समय गाजी उबैदुल्लाह खान को लश्कर ए तैयबा हर महीने 20 हजार रुपये वजीफा दे रही थी.
2005 से लश्कर के साथ जुड़ा था बिलाल अहमद सलाफी
मारा गया आतंकी कमांडर बिलाल अहमद सलाफी 2005 से लश्कर से जुड़ा था और लश्कर के वित्तीय विभाग में जिम्मेदारी संभाल रहा था, जहां शेखपुरा जिले में ये लश्कर के वित्त विभाग का प्रमुख था और हर साल 40 लाख के आसपास पाकिस्तानी रुपये इकट्ठा करके देता था.
सूत्रों के मुताबिक, बिलाल को हर महीने 1 लाख 60 रुपये वजीफा लश्कर ए तैयबा देती थी. कल शनिवार (21 मार्च) की रात मरकज तैयबा के 6 एकड़ के परिसर में स्थित जामिया उद दावा में मारे गए बिलाल सलाफी का नमाज ए जनाजा हुआ और फिर इसी परिसर में स्थित कब्रिस्तान में बिलाल को दफना दिया गया.


