Mustard Forecast 2026: नए साल की शुरुआत में सरसों बाजार स्थिर है, लेकिन सेंटिमेंट कमजोर हो रहा है। कमजोर तेल मांग, सीमित विदेशी सपोर्ट और नई आवक की उम्मीदों से तेजी बंधी हुई है। आइए जाने आगामी दिनों में सरसों के भाव क्या कुछ रह सकते है, देखें तेजी मंदी की पूरी रिपोर्ट…
Mustard Forecast 2026: नए साल के पहले हफ्ते में सरसों के भाव को लेकर जो संकेत मिल रहे हैं, वे बाजार की मौजूदा हकीकत को साफ तौर पर बयान कर रहे हैं। सरसों का बाजार फिलहाल एक रेंज में अटका हुआ है। कीमतों में स्थिरता के बीच आगामी सेंटिमेंट धीरे-धीरे कमजोर पड़ता नज़र आ रहा है। चीन की खल डिमांड ने बाजार को एकदम नीचे फिसलने से रोका हुआ है, मगर ओवरऑल रुख अब भी तेज़ी वाला नहीं कहा जा सकता।
शुक्रवार को सरसों में नरमी देखने को मिली । सुस्त तेल मांग और आने वाली नई फसल की उम्मीदों ने तेजी पर ब्रेक लगा दिया है । यही वजह है कि कारोबारी बाजार में सतर्कता के साथ कारोबार करते दिखाई दे रहे है ।
प्रमुख मंडियों में सरसों के ताज़ा भाव
सरसों के ताजा भाव (Mustard Market Price ) की बात करें तो जयपुर में सरसों का भाव कल ₹25 की मंदी के साथ ₹7100 प्रति क्विंटल रहा। जबकि दिल्ली में 42% कंडीशन सरसों का रेट ₹6900 पर पूरी तरह स्थिर रहा । वहीं भरतपुर लोकल में सरसों भाव में ₹3 की हल्की गिरावट के साथ दाम ₹6750 प्रति क्विंटल पर बंद हुआ ।
वहीं सलोनी प्लांट के रेट्स में भी किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं देखने को मिला । सलोनी शमसाबाद (आगरा), दिग्नेर (आगरा) और अलवर में सरसों ₹7725 पर बनी हुई है, जबकि कोटा प्लांट में भाव ₹7650 दर्ज किए गए।
आवक, खपत और स्टॉक के आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं
वर्ष 2025 में सरसों की कुल आवक लगभग 100.75 लाख टन रही, जबकि क्रशिंग 102.25 लाख टन के स्तर पर पहुंची। यानी खपत, आवक से थोड़ी अधिक रही। यही अहम वजह है कि कमजोर सेंटिमेंट के बावजूद सरसों बाजार में अब तक बड़ी गिरावट नहीं आई है।
Mustard के Closing Stock की बात करें तो 31 दिसंबर 2025 तक क्लोजिंग स्टॉक करीब 16 लाख टन आंका गया है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 27% कम है। यह आंकड़ा बाजार को नीचे की तरफ सीमित सहारा देता दिख रहा है।
तेल की कमजोर मांग से क्रशिंग पर दबाव
सरसों तेल की मांग फिलहाल कमजोर बनी हुई है। इसी कारण क्रशर सामान्य क्षमता से कम पर काम कर रहे हैं। हालांकि सोया तेल और सरसों तेल के बीच का अंतर घटने से सरसों तेल में बड़ी गिरावट नहीं आई, लेकिन कमजोर खपत के चलते तेज उछाल की गुंजाइश भी सीमित नजर आ रही है।
नई सरसों की हलचल और विदेशी बाजारों का असर
कुछ चुनिंदा मंडियों से नई सरसों की इक्का-दुक्का आवक की खबरें आने लगी हैं। विदेशी बाजारों से भी फिलहाल कोई मजबूत सपोर्ट नहीं मिल रहा। मलेशिया में पाम तेल के भाव लगभग 1.5% कमजोर होकर 4000 के नीचे फिसल गए, जबकि इसी दौरान CBOT पर सोया तेल के भाव लगभग इतने ही तेज हुए।
आगे का रुझान: तेजी सीमित, नरमी की आशंका
आगे के Mustard Price Forecast पर नजर डालें तो मार्च में नई आवक का दबाव बनने तक सरसों में धीरे-धीरे नरमी रह सकती है। तेजी अधिकतम ₹100–150 प्रति क्विंटल तक सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है। नीचे की ओर जयपुर बाजार पहले 7000 और उसके बाद 6800 के सपोर्ट लेवल को धीरे-धीरे टेस्ट कर सकता है।
मौजूदा हालात में हर उछाल का फायदा उठाकर माल निकालने की रणनीति ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है। जनवरी का मौसम उत्पादन और आने वाले महीनों के बाजार रुख को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
डिस्क्लेमर : किसान साथियों उक्त रिपोर्ट में दी गई सभी जानकारी इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक स्रोतों से जुटाई गई है। किसी भी प्रकार के व्यापार के लिए अपने ख़ुद के विवेक का इस्तेमाल करें ।


