Cotton import duty 2026: सरकार ने अगस्त 2025 में दी कपास आयात छूट को 31 दिसंबर को खत्म कर दिया। अब 11% ड्यूटी से किसानों को MSP से ऊपर बाज़ार दाम मिलने की उम्मीद है, लेकिन टेक्सटाइल उद्योग की लागत बढ़ेगी। मुंबई पोर्ट पर आयात महंगा, अमेरिका-भारत ट्रेड व्यापार पर असर संभव।
Cotton News: अगस्त 2025 में जब अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव चरम पर था, तब भारत सरकार ने कपास के आयात (Cotton import duty) में लगने वाले शुल्क में छूट दी थी। अब जबकि वही तनाव अभी भी जारी है, सरकार ने अचानक उस छूट को वापस ले लिया है। बुधवार (31 दिसंबर) को ड्यूटी-फ्री आयात की समय सीमा खत्म होते ही सरकार ने इसे आगे बढ़ाने के लिए कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया, जिससे 1 जनवरी 2026 से कपास आयात पर 11% की Import duty फिर से लगना शुरू हो गई है।
कपास आयात पर अब 11% ड्यूटी लगने से देश के कपास उत्पादक किसान जहां खुश नज़र आ रहे है वहीं टेक्सटाइल इंडस्ट्री को चिंता में डाल दिया है। जहाँ किसान चाहते हैं कि ड्यूटी लगने से घरेलू बाज़ार में कपास की कीमतें बढ़ें, वहीं टेक्सटाइल कंपनियों का कहना है कि इससे उनकी Production cost बढ़ जाएगी और वैश्विक Export competitiveness पर असर पड़ेगा।
किसानों का दर्द: MSP से कम बाज़ार भाव
किसानों की स्थिति सबसे ज़्यादा चिंताजनक है। क्योंकि इस समय किसानों को कपास का भाव 7,100 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल पा रहा है, जबकि सरकार ने इस सीज़न के लिए [Minimum Support Price (MSP)] 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यानी किसानों को MSP से 400-1000 रुपये कम दाम पर अपना माल बेचना पड़ रहा है।
किसान संघों ने ड्यूटी फिर से लगने का स्वागत किया है। उनका तर्क है कि जब से शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति मिली थी, तब से विदेशी कपास की वजह से घरेलू बाज़ार में कपास की कीमतें दबाव में आ गई थीं। अब जबकि 11% ड्यूटी लागू हो गया है, उम्मीद है कि बाज़ार में स्थिरता आएगी और घरेलू कपास को बढ़ावा मिलेगा।
उद्योग की चिंता: लागत बढ़ेगी, निर्यात घटेगा
टेक्सटाइल कंपनियों ने पिछले महीनों में Processed cotton की बढ़ती कीमतों की शिकायत की थी। लेकिन अब जब ड्यूटी फिर से लग गई है, तो उनकी चिंताएँ और बढ़ गई हैं। दरअसल, इस सीज़न में कपास का घरेलू उत्पादन 300 लाख गांठ से नीचे आने का अनुमान है । ऐसे में अब फिर से कपास के आयात पर 11% की Import duty लगने से टेक्सटाइल Manufacturing sector के लिए सीधा झटका है।
विदर्भ की गीमा टेक्स इंडस्ट्रीज के एमडी प्रशांत मोहता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “घरेलू कपास की दरें पहले ही 58,500 रुपये प्रति गांठ तक पहुँच गई हैं। अब टैरिफ युद्ध की वजह से आयात 4,000 रुपये महंगा हो गया है, जिससे वैश्विक (Market competition) पर सीधा असर पड़ रहा है।”
अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर की वजह से फैसला
अगस्त 2025 में जब अमेरिका ने भारतीय वस्त्र उत्पादों पर 50% का भारी भरकम टैरिफ लगाया था, तब भारत ने जवाबी कार्रवाई में कपास आयात पर लगने वाली Import duty हटा दी थी। इसके लिए सरकार ने Trade policy के तहत तत्काल निर्णय लिया था। लेकिन आज स्थिति यह है कि भले ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (FTA) का सौदा पहले से तैयार हो, लेकिन वह जानबूझकर हस्ताक्षर में देरी कर रहा है।
अमेरिकी बाज़ार भारतीय वस्त्र उत्पादों का सबसे बड़ा ग्राहक रहा है, लेकिन ऊंचे टैरिफ के कारण हमारे निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में उद्योग चाहता था कि कम से कम एक तिमाही के लिए ड्यूटी में छूट बरकरार रखी जाए ताकि कंपनियाँ अपने मार्जिन को बचा सकें।
क्या कहते है आयात के आँकड़े
International Cotton Advisory Committee (ICAC) के आँकड़े बताते हैं कि भारत ने सितंबर मध्य तक कुल 36 लाख गांठ कपास का आयात किया था। इसमें ब्राज़ील से 23% , अमेरिका से 20% और ऑस्ट्रेलिया से 19% का आयात हुआ। ये आँकड़े साफ दिखाते हैं कि भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री विदेशी कपास पर कितनी निर्भर है।
CCI की खरीद ने किसानों को राहत दी
इस पूरी स्थिति में एक अच्छी खबर यह रही कि Cotton Corporation of India ने MSP पर भारी खरीद की है। 30 दिसंबर तक CCI ने 61.5 लाख गांठें खरीदीं, जिससे किसानों को बाज़ार की कीमतों से ज़्यादा दाम मिल सके। इसके लिए सरकार ने किसानों के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि भी 31 दिसंबर से बढ़ाकर 16 जनवरी 2026 कर दी है।
आगे क्या?
रुई के वैश्विक Market price में अभी कोई बड़ी तेज़ी नहीं आई है, लेकिन 11% ड्यूटी के साथ आयातित कपास से बने उत्पादों की लागत ऊंची होना तय है। इससे निर्यातकों को मार्जिन में कमी आएगी। दूसरी तरफ, अगर किसानों मिलने वाले दाम में सुधार नहीं हुआ, तो अगली बिजाई पर भी असर पड़ सकता है। अभी तो सरकार को Market intervention करना होगा ताकि किसान और उद्योग दोनों को फ़ायदा मिल सके।
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