भारतीय सोयाबीन बाज़ार घटे उत्पादन और सीमित आवक से ₹5400 तक पहुँच गया, पिछले साल से ₹800-900 ऊपर। लेकिन USDA रिपोर्ट और ब्राज़ील में रिकॉर्ड उत्पादन से अंतरराष्ट्रीय कीमतें गिरीं। व्यापारियों को घरेलू तेज़ी भुनाने के साथ अंतरराष्ट्रीय जोख़िम से सतर्क रहना होगा।
किसान भाइयों अगर आपके पास अभी भी सोयाबीन रखा है, तो आपके चेहरे पर मुस्कान होना लाज़िमी है। घरेलू बाज़ार में Soybean ने इस साल ₹800-900 प्रति क्विंटल का प्रीमियम बनाए रखा है। कीर्ति प्लांट पर सोयाबीन का भाव (Soyabean Bhav) ₹5400 को पार कर चुका है, और बाज़ार की नज़रें अब ₹5500 के स्तर पर टिकी हैं। लेकिन वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार इसके ठीक उलट चल रहा है। USDA रिपोर्ट से कीमतें ढाई महीने के निचले स्तर पर पहुँच गई हैं। ये दोहरा खेल आपके लिए फायदेमंद है या जोखिम, आइए समझते हैं।
घरेलू सोयाबीन बाज़ार में तेजी का रूख
सोयाबीन का बाज़ार इस वक्त घरेलू मांग के दम पर मज़बूती दिखा रहा है। कीर्ति प्लांट पर भाव बढ़कर ₹5400 पर पहुँच गया है, और पिछले एक महीने में ₹620 की तेज़ी आई है। मंडियों में भाव अधिकतम ₹5200 तक बना हुआ है, हालांकि कीमतें अभी भी MSP प्राइस ₹5,328 प्रति क्विंटल से नीचे है, लेकिन गुणवत्ता वाले माल के लिए भाव अलग हैं।
मांग की बात करें, तो Soya Oil और सोया DOC की मांग में तेज़ उछाल आया है। कल ही सोया तेल में ₹20 की तेज़ी दर्ज की गई। कांडला पर 1330 और मुंबई में 1340 रुपए प्रति 10 किलो। बायोफ्यूल डिमांड की उम्मीद ने भी तेल के भाव को एक महीने के ऊपरी स्तर तक पहुँचा दिया है। बाज़ार में बढ़िया क्वालिटी की सोयाबीन की कमी है, और यही घरेलू तेज़ी की मुख्य वजह है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का ‘उल्टा’ रुख
घरेलू तेज़ी के बीच अंतरराष्ट्रीय बाज़ार आपके लिए सतर्कता का संकेत है। USDA Report के ताजा अनुमानों ने अमेरिका के निर्यात आउटलुक में कटौती की है, जिससे सोयाबीन की कीमतें करीब ढाई महीने के निचले स्तर तक फिसल गई हैं। Brazil Soybean में रिकॉर्ड उत्पादन के बड़े अनुमान सामने आ रहे हैं। इसी वजह से CBOT Soybean वायदा कमज़ोर पड़ा है।
चीन की मांग अनिश्चित बनी हुई है। ब्राज़ील की नई फसल आते ही चीन की खरीद दिशा बदलने का डर बाज़ार में बना हुआ है। इसलिए घरेलू बाज़ार के भाव उपरी स्तरों पर हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम को देखते हुए सतर्कता जरूरी है।
उत्पादन-आवक में भारी गिरावट
2025-26 मार्केटिंग सीज़न में भारत का Soybean Production घटकर करीब 105 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले सीज़न के 126 लाख टन से काफी कम है। मंडियों में दिसंबर 2025 के दौरान आवक करीब 10 लाख टन रही, जबकि दिसंबर 2024 में यह 12 लाख टन थी। यानी आवक में कमी से भी तेज़ी को सहारा मिल रहा है।
सोया मील के निर्यात में भी गिरावट दर्ज की गई है। दिसंबर 2025 में भारत से सोया मील का निर्यात घटकर लगभग 1.77 लाख टन रह गया, जबकि दिसंबर 2024 में यह करीब 2.77 लाख टन था।
व्यापारियों के लिए ‘सतर्क’ रणनीति
फिलहाल कीर्ति प्लांट पर ₹5200 का मजबूत सपोर्ट बना हुआ है और घरेलू बाज़ार में सोयाबीन का फंडामेंटल आगे भी मजबूत दिख रहा है। भाव ₹5500 की तरफ बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन विदेशी बाज़ारों में सोयाबीन की उपलब्धता को देखते हुए हर उछाल पर थोड़ा-बहुत माल हल्का करने की रणनीति कारगर दिख रही है।
डिस्क्लेमर : व्यापार आप अपने विवेक से करें। घरेलू तेज़ी को भुनाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय गिरावट का जोख़िम भी नज़रअंदाज़ न करें।


