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Uttarakhand Muslim Shop Name Controversy; Kotdwar Mohammad Deepak vs Bajrang Dal


उत्तराखंड के कोटद्वार में रहने वाले जिम ट्रेनर दीपक कुमार बीते एक हफ्ते से खौफ में जी रहे हैं। दीपक का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे एक बुजुर्ग दुकानदार के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से भिड़ गए थे। ये वीडियो 26 जनवरी का है। बजरंग दल कार्यकर्ताओं

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इसके बाद दीपक के जिम के बाहर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। वीडियो बनाकर दीपक को धमकी दी गई। इसके वीडियो भी सामने आए हैं। इनमें एक शख्स कह रहा है कि दीपक कुमार तुम टारगेट पर हो।

दीपक कहते हैं, ‘उस घटना के बाद से परिवार घबराया हुआ है। डर तो है ही। सबसे पहले परिवार ही डरता है। बेटी LKG में पढ़ती है, वो स्कूल नहीं जा पा रही। मेरी तबीयत ठीक नहीं है। जिम भी नहीं चल रहा है। घर में मां और पत्नी हैं। काम तो करना ही पड़ेगा, लेकिन हालात ठीक नहीं हैं।’

घटना के वीडियो में दीपक और बजरंग दल के कार्यकर्ता बहस करते दिख रहे हैं।

घटना के वीडियो में दीपक और बजरंग दल के कार्यकर्ता बहस करते दिख रहे हैं।

दीपक कोटद्वार में ही जिम चलाते हैं। उनका वीडियो वायरल होने के बाद राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी उनके समर्थन में आए हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं। दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं। उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज रौंदने की साजिश कर रहे हैं।

इस पर दीपक कहते हैं, ‘इस समय मैं बहुत असहज महसूस कर रहा हूं। डरने की कोई बात नहीं है, ऊपर वाले का डर होना चाहिए, पर जो हालात बने हैं, उन्होंने परिवार को परेशान कर दिया है।’

हालांकि दीपक इस बात से खुश हैं कि उन्हें लोगों का सपोर्ट मिल रहा है। वे कहते हैं, ‘ज्यादातर लोग फेवर में हैं। मैंने कोई गलत काम तो किया नहीं है, इसलिए लोग सपोर्ट कर रहे हैं। बाजार और जिम से जुड़े लोग भी साथ खड़े हैं।’

26 जनवरी को हुआ क्या था कोटद्वार में पटेल मार्ग पर बने मार्केट में बाबा स्कूल ड्रेस नाम की दुकान है। ये दुकान 70 साल के वकील अहमद की है। वीडियो में दिख रहा है कि खुद को बजरंग दल का कार्यकर्ता बता रहे कुछ लोग दुकान में घुसते हैं। वे वकील अहमद से कहते हैं कि दुकान के नाम में बाबा शब्द हटाओ। इन लोगों का दावा था कि बाबा शब्द से कोटद्वार के प्रसिद्ध सिद्धबली बाबा मंदिर को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है।

बजरंग दल के कार्यकर्ता दुकान पर पहुंचे तब वकील अहमद वहीं मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वे दुकान का नाम बदल लेंगे। इसी दौरान दीपक दुकान पर पहुंचे थे।

बजरंग दल के कार्यकर्ता दुकान पर पहुंचे तब वकील अहमद वहीं मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वे दुकान का नाम बदल लेंगे। इसी दौरान दीपक दुकान पर पहुंचे थे।

दीपक कुमार बताते हैं कि ये सब हो रहा था, तब मैं वहीं पास में अपने एक दोस्त की दुकान पर था। मेरा जिम भी वहीं है। भीड़ देखकर मैं वहां पहुंचा। मैंने बुजुर्ग दुकानदार का पक्ष लिया। भीड़ ने मेरा नाम पूछा, तो मैंने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया। मैंने एकजुटता दिखाने के लिए ये नाम बताया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

इसके बाद 31 जनवरी को बजरंग दल और हिंदूवादी संगठनों के सदस्यों ने दीपक के जिम के बाहर प्रोटेस्ट किया। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सांप्रदायिक नारे लगाए। जिम के बाहर पुलिस के सामने ही दीपक और बजरंग दल के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए थे।

वीडियो में पुलिसवाले पहले दीपक को समझाते दिख रहे हैं। फिर भीड़ से कुछ युवक दीपक के जिम की तरफ जाने की कोशिश करते दिखते हैं। पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद स्थिति संभालने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। इलाके में फ्लैग मार्च भी निकाला गया।

बजरंग दल का अभियान- जिसका काम, उसी का नाम दीपक के जिम के बाहर हुए प्रोटेस्ट में देहरादून से बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंचे थे। इन्हीं में से एक देहरादून के जिला संयोजक अमन स्वेदिया भी थे। वे भी प्रोटेस्ट के बाद के एक वीडियो में दीपक कुमार को चुनौती देते दिख रहे हैं।

हमने इस पर अमन स्वेदिया से बात की। अमन 26 जनवरी की घटना को एक अभियान का हिस्सा बताते हैं। वे कहते हैं कि बजरंग दल बीते 6 महीने से पूरे उत्तराखंड में ‘जिसका काम, उसी का नाम’ अभियान चला रहा है।

अमन इस अभियान के बारे में कहते हैं,

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आप व्यापार करिए, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अपनी पहचान मत छिपाइए। आप मुस्लिम होकर हिंदू नाम से या बाबा सिद्धबली के नाम पर दुकान क्यों चला रहे हैं। यह हिंदुत्व की पहचान का गलत इस्तेमाल है। आप अपने नाम से दुकान चलाइए, जिसे आना होगा आएगा।

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नाम को लेकर विवाद का ये बजरंग दल से जुड़ा पहला मामला नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में देहरादून में लकी हेयर सैलून नाम की एक दुकान में तोड़फोड़ करके पोस्टर फाड़ते हुए वीडियो वायरल हुआ था। वहीं, एक स्कूल में प्रेयर का विरोध करते हुए भी वीडियो आया था।

अमन दावा करते हैं कि ये सारे वीडियो भी ‘जिसका काम, उसी का नाम’ अभियान से जुड़े हैं। बजरंग दल पर कानून हाथ में लेने के आरोप लगते हैं, लेकिन अमन दावा करते हैं कि जब बोर्ड हटाने या पहचान उजागर करने की बात आती है, तो पुलिस साथ में ही रहती है। पुलिस की मौजूदगी में सब होता है।

दीपक के माफी मांगने पर अड़ा बजरंग दल 26 जनवरी की घटना पर अमन दावा करते हैं कि इसकी जानकारी पहले ही बजरंग दल के ग्रुप में शेयर की गई थी। तब भी बाबा स्कूल ड्रेस का नाम बदलवाने के लिए बजरंग दल वाले पहुंचे थे। अमन मोहम्मद दीपक पर संगठन के कार्यकर्ताओं से बदसलूकी का आरोप लगाते हैं।

वे कहते हैं, ‘उस दिन हमारे कुछ कार्यकर्ता दुकान पर नाम बदलवाने की अपील करने गए थे। वहां 75 साल के हमारे एक बुजुर्ग कार्यकर्ता थे। मोहम्मद दीपक ने उनके साथ बदतमीजी की, उन्हें धक्का और लात मारी। हमने शालीनता से बात की थी, लेकिन उन्होंने मारपीट कर खुद को हीरो दिखाने की कोशिश की। हमें उम्मीद है कि प्रशासन हमें न्याय दिलाएगा।’

दीपक के खिलाफ भी FIR दर्ज फिलहाल इस मामले में पुलिस ने तीन FIR दर्ज की हैं। पहली FIR दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर दर्ज की गई है। इसमें वकील अहमद ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं गौरव कश्यप, शक्ति सिंह और अन्य के खिलाफ नामजद शिकायत की है। इन सभी पर दुकान में घुसकर धमकी देने और गाली-गलौज का आरोप है।

दूसरी FIR दीपक कुमार के खिलाफ की गई है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं कमल पाल और गौरव कश्यप की शिकायत पर दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ FIR की गई है। उन पर मारपीट, लूटपाट, घड़ी और पैसे छीनने और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।

तीसरी FIR पुलिस ने खुद से दर्ज की है। इसमें 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ चक्काजाम करने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में केस दर्ज किया है।

सभी धर्मों की मीटिंग कराई, इलाके में अब शांति- पुलिस 26 जनवरी की घटना को लेकर CO तुषार बोरा दावा करते हैं कि इस मामले को सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। पूरे एरिया में शांति है। फिर भी एहतियात के तौर पर पुलिस तैनात है। पुलिस ने सभी धर्म के लोगों के साथ 1 फरवरी को मीटिंग भी की।

दीपक पर अभी कोई कार्रवाई नहीं दीपक कुमार ने एक वीडियो जारी कर जान का खतरा बताया था। जमीअत उलेमा-ए-हिंद, उत्तराखंड ने इस मामले में DGP को लेटर लिखा है। इसमें दीपक कुमार को सुरक्षा देने की मांग की गई है। लेटर में कहा गया है कि दीपक कुमार ने 26 जनवरी को एक मुस्लिम दुकानदार पर हुए हमले के दौरान बीच-बचाव कर व्यापारी की जान बचाई। अब उन्हें जान का खतरा बना हुआ है।

हालांकि पुलिस ऐसे किसी भी खतरे से इनकार कर रही है। CO तुषार बोरा कहते हैं, ‘कई जगह यह बात फैलाई गई कि दीपक को बुरी तरह मारा-पीटा गया है। दीपक ने खुद वीडियो जारी किया है, जिसमें वह बिल्कुल ठीक दिख रहा है। फिर भी पुलिस पूरी तरह सतर्क है। गश्त जारी है और हम हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं।’

दीपक की खिलाफ FIR पर CO तुषार बोरा सफाई देते हैं कि किसी के खिलाफ FIR दर्ज होने और जांच होने में बड़ा फर्क होता है। अभी जांच चल रही है। जांच के दौरान जो सबूत सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

धमकी देने वालों पर FIR क्यों नहीं? 31 जनवरी को हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लगभग 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR की है। जिम के बाहर से वायरल हुए वीडियो में बजरंग दल के कार्यकर्ता दीपक को धमकी देते नजर आ रहे हैं।

इस पर CO तुषार बोरा कहते हैं, ‘पुलिस ने अपनी ओर से रास्ता जाम करने और उपद्रव करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज की है। वीडियो में जो भी लोग दिख रहे हैं, चाहे वे किसी भी संगठन या दल से जुड़े होने का दावा कर रहे हों, उनकी पहचान की जा रही है। वीडियो आधार पर सभी पर कार्रवाई की जाएगी।’

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