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जो मन में आए, वो नहीं कर सकते, सांप के जहर केस में एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

फेमस यूट्यूबर और 'बिग बॉस OTT 2' विनर एल्विश यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सांप के जहर (Snake Venom) से जुड़े मामले में एल्विश यादव को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि लोकप्रियता का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति कानून को हाथ में ले या बेजुबान जानवरों का इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए करे।

 

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच एल्विश यादव की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज चार्जशीट और आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट का कहना है कि उनके इस केस ने समाज को गलत मैसेज दिया है। 


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सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, आप यह नहीं कह सकते कि जो मन में आएगा वो करेंगे। क्या आप चिड़ियाघर जाकर जानवरों के साथ खेल सकते हैं? क्या यह अपराध नहीं होगा? यदि मशहूर हस्तियां सांपों जैसे 'बेजुबान शिकार' का इस्तेमाल करती हैं, तो इससे समाज में बहुत बुरा संदेश जाता है।

 

एल्विश की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता ने कोर्ट में दलील दी कि एल्विश उस विवादित पार्टी में केवल एक मेहमान के तौर पर गए थे। उन्होंने दावा किया कि किसी भी तरह की रेव पार्टी या नशीले पदार्थों के सेवन का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। वहीं मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि बरामद किए गए 9 सांप जहरीले नहीं थे और उनके दांत/जहर ग्रंथियां नहीं थीं।

 

पूरा मामला क्या है? 

यह विवाद 3 नवंबर 2023 को शुरू हुआ था, जब नोएडा पुलिस ने सेक्टर 49 में छापेमारी की थी। मेनका गांधी के एनजीओ 'पीपुल फॉर एनिमल्स' की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। आरोप था कि एल्विश यादव अवैध रेव पार्टियों में सांपों के जहर की सप्लाई करते हैं।

 

छापेमारी के दौरान 5 कोबरा सहित 9 जहरीले सांप और करीब 20 मिलीलीटर जहर बरामद किया गया था। 17 मार्च 2024 को नोएडा पुलिस ने एल्विश को गिरफ्तार किया, जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

 

कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि क्या इस मामले में NDPS एक्ट लागू होता है, क्योंकि बचाव पक्ष का कहना है कि सांप का जहर इस एक्ट की लिस्ट में शामिल नहीं है। हालांकि, कोर्ट वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत हुई कानूनी प्रक्रिया को लेकर गंभीर है।

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