‘अतीक अब जिंदा नहीं है। प्रयागराज में उसका खौफ भी खत्म हो चुका, लेकिन मैं आज भी डर में जी रही हूं। मेरे पति को बीच बाजार में घेरकर मारने वाला गुड्डू बमबाज और अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन आज तक नहीं पकड़े गए। उनके लोग हमें धमकियां देते हैं। वीडियो भेजत
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24 फरवरी जया पाल की जिंदगी की सबसे बुरी तारीख है। तीन साल पहले इसी दिन उनके पति और पेशे से वकील उमेश पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड माफिया डॉन अतीक अहमद था। उमेश की मौत के बाद जया पाल ने अतीक समेत 10 लोगों के खिलाफ मर्डर का केस दर्ज करवाया। 36 महीने बाद भी केस की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है।
उमेश की हत्या में शामिल 10 में से 6 आरोपी मारे जा चुके हैं। अतीक की पत्नी शाइस्ता, गुड्डू मुस्लिम के अलावा शूटर अरमान और साबिर पकड़े नहीं गए। अतीक अहमद की मौत के बाद उसकी ‘IS-227 गैंग’ खत्म हो चुकी है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। यही वजह है कि 24 फरवरी, 2023 से लेकर अब तक उमेश के घर के मेन गेट और कमरों के बाहर 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है।

प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड में 36 महीने बाद भी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है। उमेश का परिवार अब भी खौफ में जी रहा है।
यूपी का सबसे चर्चित उमेश पाल मर्डर केस 3 साल बाद भी आखिर कहां अटका है, हत्यारों को सजा मिलने में कितना वक्त और लग सकता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम प्रयागराज पहुंची।
अतीक मरा, फिर ‘IS-227 गैंग’ का डर क्यों कायम अतीक की मौत के बाद भी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज ‘IS-227 गैंग’ का नाम पूरी तरह खत्म नहीं माना गया है। गैंग पर हत्या, लूट, रंगदारी, जमीन पर कब्जा करने और किडनैपिंग जैसे कई केस दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, अतीक के मारे जाने के बाद उसका नेटवर्क कमजोर पड़ा है। फिर भी कानूनी रिकॉर्ड में गैंग तब तक खत्म नहीं मानी जाती, जब तक उससे जुड़े सभी मामलों का निपटारा न हो जाए।
अतीक की गैंग पर चल रहा सबसे बड़ा मुकदमा उमेश पाल हत्याकांड का है। प्रयागराज के धूमनगंज थाने से महज 200 मीटर दूर सुलेम सराय इलाके में उमेश पाल का घर है। यहां 24 घंटे प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (PAC) और प्रयागराज पुलिस के 20 जवान तैनात रहते हैं। ये फोर्स 24 फरवरी के दिन डबल कर दी जाती है। बिना सिक्योरिटी जांच और प्रशासन की इजाजत के बगैर कोई मकान के अंदर नहीं जा सकता।
अतीक मारा गया, फिर इतनी कड़ी सुरक्षा क्यों? इसके जवाब में उमेश की पत्नी जया कहती हैं, ‘अतीक बेशक मर चुका है, लेकिन उसके गिरोह के लोग आज भी फरार हैं। वो हमसे बदला लेना चाहते हैं। मेरे सामने गुड्डू मुस्लिम ने इसी घर में बम फेंका, जिससे मेरे पति उमेश पाल और उनके गनर राघवेंद्र की मौत हो गई। मैं गुड्डू मुस्लिम का चेहरा भला कैसे भूल सकती हूं।‘
‘हमारी सुरक्षा में तो कोई कमी नहीं है, लेकिन फिर भी मन में हर वक्त घबराहट रहती है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, शूटर साबिर और अरमान अब भी हमारे लिए खतरा हैं। इन अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।‘

एक मिनट के वायरल वीडियो में हुआ उमेश हत्याकांड का खुलासा उमेश पाल की मौत के बाद घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो क्लिप में 24 फरवरी 2023 की शाम 4 बजकर 30 मिनट पर उमेश पाल कोर्ट से घर लौटते दिख रहे थे। उमेश जैसे ही घर के पास पहुंचे, बदमाशों ने उनकी कार पर फायरिंग शुरू कर दी।
उमेश अपने एक गनर राघवेंद्र सिंह के साथ घर की तरफ भागे। तभी बदमाशों ने उन पर दो बम फेंकें। दूसरे गनर संदीप निषाद कार में थे। बदमाशों ने उन्हें भी गोली मार दी। तीनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उमेश पाल और संदीप निषाद ने दम तोड़ दिया। दूसरे गनर राघवेंद्र सिंह को लखनऊ रैफर किया गया, लेकिन उनकी जान भी नहीं बच पाई।

उमेश पाल 2005 में हुए विधायक राजू पाल के मर्डर केस में गवाह थे। राजू की हत्या का आरोप भी अतीक अहमद पर था।
हत्याकांड के बाद विपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया। इसके जवाब में CM योगी ने विधानसभा में कहा- जिस अतीक अहमद के खिलाफ पीड़ित परिवार ने मामला दर्ज कराया है, वो (अतीक) समाजवादी पार्टी का पोषित माफिया है। उसकी कमर तोड़ने का काम हमारी सरकार ने किया है। मैं फिर इसी हाउस में कह रहा हूं कि इस माफिया को मिट्टी में मिला देंगे। 15 अप्रैल 2023 को अतीक और उसके भाई अशरफ की पुलिस सुरक्षा के बीच हत्या कर दी गई।
फोन पर धमकी मिली- ‘ऐसा बदला लेंगे कि 4 लोग याद करेंगे’ बातचीत के दौरान जया ने धमकी भरे मैसेज भी दिखाए, जो अनजान नंबरों से भेजे गए थे। जया का आरोप है कि अतीक की मौत के बाद उसकी गैंग के लोग हर महीने धमकी भरे मैसेज भेजते हैं। जया कहती हैं, ‘हमें 3 साल से धमकियां मिल रही हैं। घर पर बूढ़ी सास और दो बच्चे हैं। धमकियों की वजह से बच्चों को अकेले स्कूल नहीं भेजती। पुलिस साथ हो, तभी पढ़ाई के लिए घर से बाहर जाते हैं।‘

जया पाल को ये मैसेज किसी अनजान नंबर से भेजा गया था, जिसमें उमेश पाल हत्याकांड की फोटो भी थी।
उमेश के घर के पास से नकाबपोश महिलाएं पकड़ी गईं उमेश पाल की 81 साल की मां शांति पाल कहती हैं, ‘हमें डराने के लिए अतीक के रिश्तेदार धमकियां दे रहे हैं। हम घर पर क्या करते हैं, कौन हमसे मिलने आ रहा है, बच्चे कब बाहर जाते हैं, इनकी जानकारी अतीक की गैंग तक बराबर पहुंचाई जा रही है।‘
पिछले साल अगस्त में बुर्का पहने चार महिलाओं को पुलिस ने हमारे घर के पास से पकड़ा था। उन्होंने पूछताछ में बताया कि वे अतीक के ड्राइवर के कहने पर हमारे बारे में जांच-पड़ताल कर रही थीं।

‘उन्होंने गली के अंदर आकर हमारे घर में भी घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिसवालों ने पकड़ लिया। इस घटना के बाद से हमारी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।‘
बेटे को याद कर शांति आगे कहती हैं, ‘मेरे बेटे ने एक माफिया से 18 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। उनकी तीसरी पुण्यतिथि है। उमेश की याद तो शायद कभी कम नहीं होगी, लेकिन अब उनके पीछे परिवार को संभालने वाला कोई नहीं है।‘

गुड्डू-शाइस्ता की गिरफ्तारी न होना केस अटकने की बड़ी वजह उमेश पाल की हत्या के बाद यूपी पुलिस ने सबसे पहले असद के ड्राइवर अरबाज को धूमनगंज के नेहरू पार्क में 27 फरवरी को मुठभेड़ में ढेर किया। इसके बाद दूसरे एनकाउंटर में 6 मार्च को उमेश पाल पर पहली गोली चलाने वाला विजय चौधरी उर्फ उस्मान मारा गया। 13 अप्रैल को झांसी में UP-STF ने माफिया अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम का एनकाउंटर कर दिया।
मामले में शामिल 3 अपराधियों के एनकाउंटर के बाद 15 अप्रैल को पुलिस कस्टडी में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या कर दी गई। फिलहाल, उमेश पाल हत्याकांड में शामिल 5-5 लाख के इनामी 3 शूटर गुड्डू मुस्लिम, साबिर और अरमान फरार हैं। अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन भी फरार है। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम है। शाइस्ता के साथ अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और बहन आयशा नूरी भी मोस्टवांटेड लिस्ट में हैं।

उमेश पाल हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी पर हमने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट विक्रम सिंह से बात की। वे कहते हैं, ‘जब तक पुलिस इस हत्याकांड के सभी आरोपियों को पकड़कर कोर्ट में हाजिर नहीं करती। मामले की सुनवाई का आगे बढ़ना मुश्किल होगा। गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। फिलहाल ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होना बाकी है।’
’जया पाल ने 10 लोगों के खिलाफ शुरुआती FIR दर्ज करवाई थी। तीन साल के अंदर आरोपी बढ़कर 17 हो गए हैं। आरोपियों में अतीक का बहनोई डॉक्टर अखलाक अहमद, सदाकत खान, अतीक के वकील खान सौलत हनीफ, विजय मिश्रा और अतीक के बेटे मोहम्मद उमर और अली अहमद भी शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी के बाद केस एविडेंस स्टेज पर आ चुका है।’

महाकुंभ तक प्रयागराज में छिपी थी शाइस्ता, गुड्डू भारत में नहीं गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन की आखिरी लोकेशन क्या थी? उनके बारे में हमने प्रयागराज पुलिस के सीनियर अफसर से बात की।
वे बताते हैं, ‘यूपी पुलिस और STF की टीमें गुड्डू मुस्लिम, शाइस्ता, साबिर और अरमान को पकड़ने के लिए अब तक 14 राज्यों में दबिश दे चुकी हैं। उनकी खोजबीन के दौरान हमें अतीक की IS-227 गैंग के कुल 121 बदमाशों और 74 सहयोगियों का पता चला है। इनमें कुछ बड़े व्यापारी भी शामिल हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है।’
‘नवंबर 2025 को हमें इनपुट मिला कि गुड्डू मुस्लिम फर्जी पासपोर्ट के सहारे दुबई भागा है। कोलकाता एयरपोर्ट के इमीग्रेशन रिकॉर्ड की जांच में ये सामने आया है कि 6 दिसंबर 2024 को सैयद वसीमुद्दीन नाम के एक शख्स ने एतिहाद एयरलाइंस की फ्लाइट पकड़ी थी। उसके पासपोर्ट पर लगी तस्वीर गुड्डू मुस्लिम से काफी मिल रही थी। हालांकि अभी इसकी जांच चल रही है।’
पुलिस के मुताबिक फरवरी 2025 तक शाइस्ता परवीन की लास्ट लोकेशन प्रयागराज में मिली थी। बाद में पुलिस को इनपुट मिला कि वो महाकुंभ मेले के दौरान प्रयागराज से फरार होकर पश्चिम बंगाल चली गई है। अब तक उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी है।
शाइस्ता के अलावा, गिरोह की दो महिला सदस्य रूबी उर्फ जैनब (अशरफ की पत्नी) और आयशा नूरी (अतीक की बहन) भी फरार हैं। दोनों पर 25 हजार का इनाम रखा गया है।

विधानसभा लड़ना चाहते थे उमेश पाल साल 2004 की बात है, अतीक उस वक्त इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से विधायक था। उसने 1989 के बाद लगातार 5 चुनाव जीते थे। अतीक के सांसद बनने से ये सीट खाली हो गई। 2004 में अतीक ने अपने भाई अशरफ को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन BSP कैंडिडेट राजू पाल ने अशरफ को 4 हजार वोट से हरा दिया। अशरफ के चुनाव हारने पर अतीक बौखला गया।
25 जनवरी, 2005 को राजू पाल के काफिले पर हमला हो गया। राजू पाल को कई गोलियां लगीं, तब उमेश पाल ने ही उन्हें हॉस्पिटल पहुंचाया था। डॉक्टर राजू पाल को नहीं बचा पाए। पोस्टमॉर्टम में उनके सीने से 19 गोलियां निकाली गई थीं। राजू पाल की हत्या के बाद उमेश पाल का नाम चर्चा में आया। उन्हें इस केस में मुख्य गवाह बनाया गया।
बताया जाता है कि अतीक ने उमेश को कई बार फोन कर केस से हटने के लिए कहा। जान से मारने की धमकी दी। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उनका अपहरण करा लिया। उन्हें रातभर पीटा। बिजली के शॉक दिए। मनमाफिक गवाही देने के लिए टॉर्चर किया गया। इसके बाद छोड़ दिया गया। 2007 में अतीक और अशरफ के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट लिखी गई।
इसके बाद उमेश पाल पॉलिटिक्स में चले गए। 2006 से 2012 तक BSP में रहे। फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। 2022 में विधानसभा चुनाव के समय BJP जॉइन कर ली। उनकी पत्नी जया पाल के मुताबिक, उमेश प्रयागराज की फाफामऊ सीट से विधायक का चुनाव लड़ना चाहते थे। राजू पाल हत्याकांड में गवाह होने की वजह से उमेश पहले से अतीक गैंग के निशाने पर थे। 24 फरवरी, 2023 को उनकी हत्या कर दी गई।

उमेश की मौत के बाद अतीक का साम्राज्य खत्म उमेश पाल के मर्डर से पहले अतीक पर हत्या, हत्या की साजिश, रंगदारी और किडनैपिंग के करीब 60 केस दर्ज थे। अतीक पॉलिटिक्स में भी तेजी से आगे बढ़ा। 2012 में उसका सियासी रसूख इतना बढ़ गया था कि उसने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी, तो हाईकोर्ट के 10 जजों ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। 11वें जज ने सुनवाई की और अतीक अहमद को जमानत मिल गई।
अतीक ने एक बार लोकसभा और 5 बार विधानसभा का चुनाव जीता। 2004 में उसने फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा। इस दौरान दिए हलफनामे में अतीक ने अपनी संपत्ति 3.36 करोड़ रुपए बताई थी।
2012 में अतीक ने इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, तो संपत्ति 20.79 करोड़ रुपए हो गई। 2018 में फूलपुर सीट पर उपचुनाव हुआ। इसमें अतीक ने अपनी संपत्ति 25.50 करोड़ बताई। 2019 में अतीक ने PM मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। ये उसका आखिरी इलेक्शन था।
उमेश पाल की हत्या में नाम आने के बाद अतीक का साम्राज्य ढहना शुरू हो गया। सरकार के मुताबिक, बीते 3 साल में अतीक की करीब 3000 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है। ………………… ये खबर भी पढ़ें…
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