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अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान में 200 से ज्यादा मौतें, तेहरान ने भी दागीं मिसाइलें… धुआं-धुआं हुआ मिडिल ईस्ट


इजरायल और अमेरिका ने शनिवार (28 फरवरी 2026) को ईरानी राष्ट्रपति भवन सहित कई ठिकानों पर हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिका सैन्य ठिकानों, तेल अवीव और इजरायल के अन्य स्थानों पर मिसाइल हमले किए. ईरान में अब तक इस हमले में 85 स्कूली छात्राओं समेत करीब 200 लोगों की मौत हो चुकी है. इजरायली हमले में ईरान के रक्षा मंत्री आमिर नासिरजादेह और IRGC के कुछ कमांडरों की मौत के दावे भी किए जा रहे हैं. इजरायल ने कहा कि इस ऑपरेशन की तारीख हफ्तों पहले तय की गई थी, जिसका मकसद ईरानी शासन को उखाड़ फेंकना है. इस हमले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और राष्ट्रपति सुरक्षित हैं.

ईरान में 200 से ज्यादा मौतें

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के हमलों में उसके 201 लोग मारे गए और 747 लोग घायल हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन लक्ष्य बताए. पहला- ईरानी नौसेना को खत्म करना, दूसरा- ईरान के मिसाइल उद्योग को नष्ट करना और तीसरा यह सुनिश्चित करना कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके. ट्रंप ने संभावित अमेरिकी हताहतों की चेतावनी भी दी. हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने कहा कि जवाबी कार्रवाई विनाशकारी होगी. इजरायल और अमेरिका ने ईरान के तेहरान, तबरेज, करमनशाह, कॉम, कराज, इस्फहान पर हमला किया. तेहरान का आसमान हमले के बाद धुएं के गुबार से भरा रहा.

अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान का हमला

इस हमले के जवाब में ईरान ने कतर में अल उदेइद एयर बेस, कुवैत में अल सालेम बेस, यूएई में अल धाफरा एयर बेस, बहरीन में यूएस 5वीं फ्लीट बेस, सऊदी अरब की राजधानी रियाद, इजरायल के हाइफा और गैली शहरों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागे. फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम ने संयुक्त बयान जारी कर कहा, ‘ईरान परमाणु कार्यक्रम को बंद करे और अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाए. हमारे देशों में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों से बचे. ईरान अपने ही लोगों के खिलाफ की जा रही भयावह हिंसा और दमन को बंद करे.’

फ्रांस, जर्मनी और यूके ने जारी किया संयुक्त बयान

फ्रांस, जर्मनी और यूके ने साफ किया कि वे इस हमले में शामिल नहीं थे, लेकिन वे संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और दूसरे अन्य देशों के संपर्क में हैं. बयान में कहा गया, ‘हम क्षेत्र के देशों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. ईरान को अंधाधुंध सैन्य हमलों से बचना चाहिए. हम वार्ता को फिर से शुरू करने का आह्वान करते हैं और ईरानी नेतृत्व से आग्रह करते हैं कि वह बातचीत के जरिए समाधान खोजे. अंततः ईरानी जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने की अनुमति मिलनी चाहिए.’

एस जयशंकर ने अब्बास अराघची से बात की

पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव को बढ़ने से रोकने का शनिवार को आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और उनके इजरायली समकक्ष गिदोन सार के साथ फोन पर बातचीत की. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है.



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