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कभी विलेन बनकर डराया, तो कभी बेबस पिता के किरदार में रुलाया, हर रोल में जान फूंक देता है बॉलीवुड का ये एक्टर

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भारतीय सिनेमा के फलक पर कुछ ही ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने अपनी एक्टिंग से हर पीढ़ी को मंत्रमुग्ध किया है. 28 की उम्र में 60 साल के बुजुर्ग का किरदार निभाकर सबको चौंकाने वाले इस एक्टर का सफर आज चार दशकों के बाद भी जारी है. इन्होंने कभी खूंखार विलेन बनकर दर्शकों को डराया, तो कभी एक बेबस पिता के रूप में सबकी आंखें नम कर दीं. 500 से अधिक फिल्मों का अनुभव और चुनौतियों को स्वीकार करने का जज्बा ही इन्हें पिछले 42 सालों से बॉलीवुड का असली पावरहाउस बनाता है.

नई दिल्ली. अनुपम खेर अपनी शानदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. वह ऐसे कलाकार हैं, जो अपने हर नए अवतार से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने का हुनर रखते हैं. चाहे गुदगुदाती कॉमेडी हो, खूंखार विलेन का रूप, भावुक पिता की छवि या कड़क पुलिस कमिश्नर का किरदार, उन्होंने हर भूमिका में खुद को पूरी तरह ढाल लिया है. उनकी हर फिल्म में एक अनूठा अंदाज, अटूट जज्बा और अभिनय का एक नया रूप देखने को मिलता है. आज अनुपम खेर का जन्मदिन है. इस मौके पर उनके फिल्मी सफर पर एक नजर डालते हैं.

अनुपम खेर का जन्म 7 मार्च 1955 को हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ था. वह एक कश्मीरी पंडित परिवार से हैं. उनके पिता पुष्कर नाथ खेर वन विभाग में क्लर्क थे और माता दुलारी खेर घर संभालती थीं. उन्हें बचपन से ही अभिनय में रुचि थी, इसलिए उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी और चंडीगढ़ के पंजाबी विश्वविद्यालय में भारतीय नाटक की पढ़ाई की. बाद में उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में भी दाखिला लिया.

अनुपम खेर की फिल्मी यात्रा की शुरुआत 1984 में महेश भट्ट की फिल्म ‘सारांश’ से हुई. इस फिल्म में उन्होंने 28 साल की उम्र में 65 साल के बुजुर्ग पिता का रोल निभाया. लोग हैरान थे कि इतनी कम उम्र में उन्होंने ये किरदार कैसे निभाया? जब कोई ये सवाल उनसे पूछता तो इस पर अनुपम बस मुस्कुरा कर कहते है कि फिल्म है, जादू है. यही उनकी कला का कमाल था. इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला.

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इसके बाद अनुपम खेर ने नेगेटिव रोल्स में भी अपनी छाप छोड़ी. ‘कर्मा’, ‘तेजाब’, और ‘चालबाज’ जैसी फिल्मों में उनका विलेन अंदाज लोगों को बहुत पसंद आया. इसके साथ ही, उन्होंने कॉमिक रोल्स में भी अपनी प्रतिभा दिखाई. ‘राम लखन’ जैसी फिल्म में उनका कॉमिक किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट परफॉर्मेंस इन कॉमिक रोल अवॉर्ड से नवाजा गया.

अनुपम खेर ने जीवन के हर दौर में चुनौतियों को अपनाया. ‘डैडी’ फिल्म में उनका किरदार बेहद जटिल था, इसके लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड स्पेशल जूरी और फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड मिला. वे हमेशा यही कहते हैं कि हर रोल में नया एक्सपेरिमेंट जरूरी है. इसी वजह से उनकी फिल्मों में हर किरदार में अलग जीवन दिखाई देता है.

उन्होंने बॉलीवुड के अलावा अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया. ‘बेंड इट लाइक बेकहम’, ‘लास्ट’, ‘काउंटिंग’, और ‘सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक’ जैसी फिल्मों में उनका अभिनय लोगों को आज भी याद है. ब्रिटिश टीवी फिल्म ‘द बॉय विद द टॉप कनॉट’ में उनके काम के लिए उन्हें बाफ्टा में नामांकन भी मिला.

अनुपम खेर ने सिर्फ अभिनय ही नहीं किया, बल्कि निर्देशन और प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया. ‘ओम जय जगदीश’ और ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ जैसी फिल्मों को उन्होंने निर्देशित और प्रोड्यूस किया. वे एक्टिंग स्कूल ‘एक्टर प्रिपेयर्स’ के संस्थापक भी हैं. टीवी पर उन्होंने ‘न्यू एम्स्टर्डम’ और ‘मिसेज विल्सन’ जैसे शोज में भी काम किया.

उनकी कला और समाजसेवा को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2004 में पद्मश्री और 2016 में पद्मभूषण से सम्मानित किया. साल 2021 में उन्हें हिंदू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका से ऑनररी डॉक्टरेट की डिग्री भी मिली.

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