अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से अपना मिसाइल सिस्टम हटाकर मिडिल ईस्ट भेज दिया है. अमेरिका के इस फैसले से दक्षिण कोरिया खुश नहीं है. अमेरिका टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम के कुछ हिस्सों और दूसरे सैन्य गतिविधियों से जुड़े सामान दक्षिण कोरिया से हटा रहा है. ये सिस्टम दक्षिण कोरिया को परमाणु हथियार से संपन्न उत्तर कोरिया से सुरक्षा देने में अधिक मदद करते हैं. इनके अलावा अमेरिका की बड़ी संख्या में सैनिकों की मौजूदगी (28,500) और जमीन से हवा में मार करने वाले डिफेंस सिस्टम शामिल हैं.
दक्षिण कोरिया का सियोंगजू गांव है, जहां अमेरिका का THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात है. यह उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच युद्ध की स्थिति का अहम ठिकाना है. इसे एक तरह से ईरान की जीत बताया जा रहा है, क्योंकि इससे अब दक्षिण कोरिया पर उत्तर कोरिया को हमला करने का एक बड़ा मौका मिल गया है.
अमेरिका के इस फैसले से रूस-चीन भी नाराज; दक्षिण कोरिया भी खुश नहीं
यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया की मिसाइलों से बचाता है. इससे चीन और रूस के बीच भी नाराजगी देखी गई है. दोनों देशों ने इस रडार सिस्टम को हटाने के फैसले को दक्षिण कोरिया की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिण कोरिया को सुरक्षा देने की प्रतिबद्धता पर सवाल भी उठने लगे हैं. इधर, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति लीजे म्युंग ने अमेरिका के इस फैसले का विरोध जताया था.
दक्षिण कोरिया के अखबार जूंगआंग डेली ने बताया कि देश की अपनी सुरक्षा करने की क्षमता में आई कमी चिंताएं बढ़ाती है. सरकार को मिशन के बाद इनकी वापसी को सुनिश्चित करना चाहिए, साथ ही खुद के डिफेंस क्षमताओं को मजबूत करने की कोशिश तेजी से की जानी चाहिए.
एक्सपर्ट्स बोले- नॉर्थ कोरिया उठा सकता है फायदा
सांगजी विश्वविद्यालय के मिलिट्री स्टडीज के प्रोफेसर चोई गी-इल ने द गार्डियन को कहा है कि इस बात का खतरा है कि उत्तर कोरिया इन हथियारों की दोबारा तैनाती को गलत तरह से ले सकता है. वह हमारी डिफेंस सिस्टम को परखने के लिए उकसावे से भरे हमले कर सकता है. इसके अलावा उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने फरवरी में कहा था कि वह अपने देश के परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ाने पर ध्यान देंगे. उन्होंने दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया है. इधर, दक्षिण कोरिया ने कहा है कि अमेरिका के इस फैसले से हमारी क्षमता पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा.
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