बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। पार्टी की कमान पूर्व PM खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है।
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दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। वे पार्टी की इंटरनेशनल सेल के प्रमुख हैं। अगर BNP सत्ता में आती है तो अब्दुल मोइन खान विदेश मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में भारत-बांग्लादेश रिश्तों की दिशा तय करने में उनकी अहम भूमिका होगी। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…
सवाल: भारत-बांग्लादेश के रिश्ते अब तक के सबसे खराब दौर में हैं। अगर BNP की सरकार बनी, तो भारत के लिए क्या रुख होगा? जवाब: बांग्लादेश की विदेश नीति एकदम साफ है। दोस्ती सभी से, दुश्मनी किसी से नहीं। हमने भारत के लिए पहले भी यही पॉलिसी अपनाई है और आगे भी ऐसा ही करेंगे। भारत या किसी और देश में कुछ भी स्पेशल नहीं है।
भारत-बांग्लादेश के संबंध सबसे खराब दौर में हैं या नहीं, ये यूनुस सरकार बताएगी। आम लोग अंतरिम सरकार की विदेश नीति, खासतौर पर भारत के साथ रिश्तों की वजह से खुश नहीं है। वे भारत जैसे बड़े पड़ोसी से बिगड़ रहे रिश्तों से भी नाखुश हैं।
सवाल: बांग्लादेश और भारत के रिश्ते खराब होने की वजह क्या है? जवाब: दो देशों के बीच रिश्ते सरकारों के रिश्ते नहीं होते। भारत ने बांग्लादेश के मामले में बहुत गलत किया। वे अवामी लीग और शेख हसीना से अच्छे रिश्ते चाहते थे। असल में उन्हें बांग्लादेश के लोगों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने चाहिए थे।
भारत के नेता, विदेश मंत्रालय के अधिकारी और सुरक्षाबल बांग्लादेश के लोगों की भावना समझने में नाकाम रहे हैं। अगर उन्होंने बांग्लादेश के लोगों को समझा होता, तो ये हालात नहीं होते।
सवाल: क्या आपकी पार्टी भारत से अच्छे रिश्तों के लिए पहल करेगी जवाब: हम भारत से दोस्ती चाहते हैं। दुनिया के सभी मुल्कों से अच्छे और बराबरी वाले रिश्ते चाहते हैं। साउथ एशिया को एक ताकत के तौर पर उभरते देखना चाहते हैं। साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन यानी सार्क भी हमने मिलकर बांग्लादेश में ही बनाया था। दुनिया के हर मुद्दे या मुसीबत में साउथ एशिया अपना अलग पक्ष मजबूती के साथ रख सकता है। दुख की बात है कि सार्क काम नहीं कर रहा है।

सवाल: क्या आपकी पार्टी चाहती है कि अवामी लीग से बैन हटे और शेख हसीना की वापसी हो? जवाब: शेख हसीना ने बांग्लादेश में जो भी किया, उसके बाद लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। शेख हसीना को देश छोड़कर जाना पड़ा। शेख हसीना को बांग्लादेश कोर्ट ने सजा सुना दी है। भारत ने उन्हें शरण दी है और बांग्लादेश की सरकार प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।
हमें नहीं पता कि भारत ने हसीना को किस आधार पर पनाह दी है। उनके समर्थन में प्रोग्राम किए जा रहे हैं। अगर ये होता रहेगा, तो भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कैसे अच्छे होंगे।

सवाल: अगर आप सत्ता में आए, तो क्या शेख हसीना की वापसी के लिए भारत से बात करेंगे? जवाब: इसके लिए आपको इंतजार करना होगा। BNP लोगों की आवाज से चलने वाली पार्टी है, जो लोग चाहेंगे, हम वही करेंगे।
सवाल: डॉ. यूनुस का डेढ़ साल का कार्यकाल आपको कैसा लगा, क्या अंतरिम सरकार निष्पक्ष तरीके से चुनाव करवा रही है? जवाब: सरकार ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए माहौल बनाने की कोशिश तो की है। हालांकि, अधिकारियों की नियुक्तियों पर सवाल उठ रहे हैं। कई अधिकारी शेख हसीना सरकार में काम कर चुके हैं। वही अब चुनाव कराएंगे। इलेक्शन कमीशन चुनाव कराने के लिए इन्हीं अधिकारियों के भरोसे है।

सवाल: बांग्लादेश में चुनाव के साथ रेफरेंडम भी कराया जा रहा है। लोगों को वोट करना होगा कि संविधान में बदलाव होने चाहिए या नहीं। आपको नहीं लगता इससे कन्फ्यूजन होगा? जवाब: मेरा मानना है कि सरकार को इन दोनों चीजों को मिलाना नहीं था। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि रेफरेंडम की क्या जरूरत है।
लोगों को बांग्लादेश की मौजूदा लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत लग रही है। किसी एक के पास बहुत ज्यादा ताकत नहीं होनी चाहिए, शक्ति का संतुलन होना चाहिए। ऐसे में बदलाव के लिए बांग्लादेश में आम सहमति बन गई है।
सवाल: BNP के सामने जमात-ए-इस्लामी बड़ी चुनौती है। आप जमात और उसकी विचारधारा के बारे में क्या सोचते हैं? जवाब: 35 साल की राजनीति में मुझे समझ आया है कि राजनीति और चुनाव दोनों अलग-अलग चीजें हैं। मुझे लगता है कि जमात राजनीति में अच्छी हो सकती है, लेकिन चुनाव में वो कोई बड़ी ताकत नहीं बन पाएंगे।
सवाल: जमात-ए-इस्लामी मानता है कि बांग्लादेश में शरिया कानून से शासन चलना चाहिए, आपका क्या मानना है? जवाब: जमात अलग-अलग बात करती है। 6 महीने पहले वे कह रहे थे कि देश को शरिया कानून के तहत चलाना चाहते हैं। कुछ दिन पहले जमात नेता ने कहा कि बांग्लादेश में शरिया कानून नहीं थोपेंगे। लोगों को लगता है कि वे राजनीतिक सुविधा के मुताबिक रुख बदलते रहते हैं। मुझे लगता है कि जमात ने खुद को पहले की तुलना में बदला है।

सवाल: अगर लोग रेफरेंडम में वोट देते हैं, तो क्या बांग्लादेश का सेक्युलरिज्म कायम रहेगा या खत्म कर दिया जाएगा? जवाब: बांग्लादेश आधिकारिक तौर पर कभी सेक्युलर राज्य नहीं रहा है। भारत सेक्युलर राज्य है। हां, बांग्लादेश ने हमेशा सेक्युलर देश के तौर पर ही व्यवहार किया है। यहां घूमने से आपको पता चल जाएगा कि देश में धार्मिक कट्टरता नहीं है।
सवाल: बीएनपी की चेयरपर्सन खालिदा जिया के निधन के बाद उनके बेटे तारिक रहमान ने कमान संभाली है। वे ज्यादातर देश से बाहर रहे हैं, लोग कहते हैं कि उन्हें बांग्लादेश की जमीनी हकीकत नहीं पता है। इससे कैसे निपटेंगे? जवाब: तारिक रहमान लोगों से जुड़े व्यक्ति हैं। उनके काम करने का अपना स्टाइल है। रूरल एरिया में लोगों और पार्टी के कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पकड़ है। ये कहना गलत होगा कि जमीन पर उनकी पकड़ कमजोर है।

सवाल: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हत्याओं की खबरें देखी-सुनीं। दीपू चंद्र दास को सरेआम मारा और पेड़ पर लटकाकर जला दिया। ऐसा क्यों हो रहा है? जवाब: ऐसी एक-दो घटनाएं हुई हैं। हर घटना में ये नहीं कहा जा सकता कि किसी को इसलिए मारा गया क्योंकि वो हिंदू था। बांग्लादेश जैसे देश की दिक्कत ये है कि यहां गरीबों को सताया जाता है। लोगों को धर्म के आधार पर कम और समाज में स्तर के आधार पर ज्यादा प्रताड़ित किया जा रहा है।
सवाल: वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी जमात-ए-इस्लामी के नेताओं से मिल रहे हैं। क्या अमेरिका बांग्लादेश के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है? जवाब: मैंने पूरी रिपोर्ट पढ़ी है। इसे गलत तरह से समझा गया है। रिपोर्ट की भाषा से गलतफहमी फैली है। इसमें साफ तौर पर अधिकारी के हवाले से लिखा है कि अमेरिका ने जमात को उसके कट्टर रुख को लेकर चेतावनी दी है। अमेरिका ने जमात को समर्थन दिया है, ये बात सही नहीं है।
सवाल: BNP चुनाव में किन मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जा रही है? जवाब: बांग्लादेश का जन्म लोकतंत्र के लिए हुआ था। हम चाहते हैं कि बांग्लादेश में लोकतंत्र होना चाहिए। 2009 के बाद से हमने लगातार 17 साल तक लोकतंत्र खत्म होते देखा है। इस दौरान अवामी लीग ने दमन, उत्पीड़न और यहां तक हत्याएं भी कीं।
छात्रों ने सरकार से यही मांग की थी कि वे मेरिट के आधार पर नौकरियां चाहते हैं, न कि आरक्षण के आधार पर। शेख हसीना सरकार ने छात्रों को मारना शुरू कर दिया। यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के मुताबिक, 1600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, लेकिन शेख हसीना सरकार का खात्मा हुआ और अंतरिम सरकार बनी। अब आखिरकार चुनाव होने जा रहे हैं।

चुनाव के साथ जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह बांग्लादेश में वोटिंग वाले दिन जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह होगा। जुलाई चार्टर संवैधानिक और राजनीतिक सुधार का डॉक्युमेंट है। इसमें प्रधानमंत्री की सत्ता सीमित करने की बात है, ताकि कोई हमेशा के लिए सत्ता में न रह सके। प्रधानमंत्री का कार्यकाल 8 या 10 साल करने की भी बात है।
जुलाई 2025 में, पॉलिटिकल पार्टियों और नागरिक संगठनों के बीच जुलाई चार्टर नाम से संविधान सुधार प्रस्ताव बना था। इसमें 26 पॉइंट हैं। चार्टर के जरिए 4 अहम चीजें तय करने की कोशिश हुई है।
- भविष्य में चुनाव कैसे होंगे
- सेना या न्यायपालिका की क्या भूमिका रहेगी
- भ्रष्टाचार और मानवाधिकार से जुड़ी नई नीतियां कैसी होंगी
- शेख हसीना पर लगे प्रतिबंध जारी रहेंगे या नहीं
जनमत संग्रह में लोगों से जुलाई चार्टर को लागू करने के आदेश पर राय मांगी जाएगी। इसमें प्रावधान है कि राजनीतिक दलों की अलग-अलग मांगों के बीच संतुलन बनाने के लिए 100 सदस्यों वाले अपर हाउस प्रतिनिधित्व के आधार पर बनाया जाएगा, यानी जिस पार्टी को जितने वोट मिलेंगे, उसी अनुपात में उसे सीटें दी जाएंगी।
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बांग्लादेश से ये इंटरव्यू भी पढ़ें… हिंदूवादी नेता का नामांकन रद्द, बोले-बांग्लादेश की पार्टियां नहीं चाहतीं हम संसद पहुंचें

बांग्लादेश की राजधानी ढाका की गोपालगंज सीट से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना चुनाव लड़ा करती थीं। इस सीट से इस बार हिंदूवादी नेता और वकील गोबिंद चंद्र प्रमाणिक निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले थे। उनका नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया। गोबिंद बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत के महासचिव हैं। आरोप है कि उनका नामांकन हिंदू होने की वजह से रद्द किया गया है। पढ़ें पूरा इंटरव्यू…


