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Bangladesh PM Aide Vs India; Abdul Moyeen Khan Sheikh Hasina | Hindu Attacks


बांग्लादेश में अब BNP की सरकार है। बीते 18 साल लंदन में रहे तारिक रहमान प्रधानमंत्री हैं। बहुमत से चुनी गई नई सरकार के सामने देश की इकोनॉमी को दोबारा पटरी पर लाने, भारत से रिश्ते सुधारने, अल्पसंख्यकों की हिफाजत करने के साथ ही कट्टरपंथ से निपटने की चु

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दैनिक भास्कर ने BNP के सेंट्रल कमेटी मेंबर और सांसद डॉ. अब्दुल मोईन खान से बात की। पार्टी और सरकार की पॉलिसी बनाने में उनका अहम योगदान होता है। मोईन खान PM रहमान के करीबी सलाहकार माने जाते हैं। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

सवाल: तारिक रहमान सरकार के सामने सबसे बड़ी तीन चुनौतियां क्या हैं? जवाब: सरकार के सामने पहली चुनौती इकोनॉमी को सुधारना है। बांग्लादेश से लाखों डॉलर बाहर ले जाए गए। इंडस्ट्री खत्म कर दी गई हैं। कारोबारी सरकार का हिस्सा बन गए। दूसरी चुनौती लोकतांत्रिक ढांचे को बेहतर बनाना है। तीसरी चुनौती संस्थाओं की बहाली करने की है। ब्यूरोक्रेसी से लेकर ज्यूडिशियरी और बैंकिंग सिस्टम तक, सब बहाल करना है।

सवाल: बांग्लादेश और भारत ने बीते डेढ़ साल में रिश्तों का खराब दौर देखा है। नई सरकार इस पर क्या करने वाली है? जवाब: अवामी लीग की तानाशाही और गलत नीतियों की वजह से ये हालात बने हैं। बांग्लादेश की विदेश नीति का मूलमंत्र है- दोस्ती सभी के साथ, दुश्मनी किसी से नहीं। BNP इसी पर यकीन करती है। हम आगे भी इसी पॉलिसी को फॉलो करेंगे। विदेश नीति की ताली एक हाथ से नहीं बजती। इसमें दोनों तरफ से गर्मजोशी होनी चाहिए।

भारत जैसे पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते इस बात पर निर्भर करते हैं कि भारत ने अपनी पॉलिसी में कैसे बदलाव किए हैं। भारत के नेताओं, फॉरेन और डिफेंस पॉलिसी बनाने वालों को साथ मिलकर बांग्लादेश के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए। मुझे लगता है कि भारत को बांग्लादेश के लिए विदेश नीति में बदलाव करना होगा। उसे समझना होगा कि पिछले डेढ़ दशक में क्या गड़बड़ी हुई है।

सवाल: शेख हसीना अब भी दिल्ली में हैं। क्या ये बांग्लादेश-भारत के बीच टकराव की वजह बनेगा? जवाब: निश्चित तौर पर यह मुद्दा है। अगर आप किसी से पूछेंगे कि आपके देश को जिसने बर्बाद किया और वो दूसरे देश में पनाह लिए हुए है, तो ये भावना आनी स्वाभाविक है।

सवाल: क्या आप शेख हसीना की वापसी चाहते हैं? जवाब: बिल्कुल। भारत पर निर्भर करता है कि वो क्या करना चाहते हैं। अगर किसी ने 18 करोड़ लोगों के साथ नाइंसाफी की है, तो इंसाफ होना चाहिए। मुझे लगता है कि भारत बांग्लादेश के बारे में अपनी समझ बढ़ाएगा। अगर वे अपनी विदेश नीति की खामियों पर सोचेंगे, तो निश्चित रूप से कोशिश करेंगे।

सवाल: क्या रहमान सरकार हसीना को वापस बांग्लादेश भेजने की मांग करेगी? जवाब: हमारे नेता तारिक रहमान ने कहा है कि हम नफरत की राजनीति नहीं करते हैं। हम ये तय करना चाहते हैं कि इंसाफ हो। बांग्लादेश के लोगों ने इस पर खुद राय बनाई है। इस मामले में कानूनी रास्ते और प्रक्रिया को देखा जाएगा।

सवाल: अल्पसंख्यकों पर हाल में बार-बार हमले हुए हैं, क्या कानून व्यवस्था नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती रहेगी? जवाब: बांग्लादेश के लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। वे धार्मिक रूप से कट्टर हैं, ये कहना सही नहीं होगा। बांग्लादेश में इस्लाम को मानने वाले ज्यादा हैं, लेकिन उनकी सोच हिंदू, क्रिश्चियन, बौद्ध सभी को लेकर खुली हुई है। कुछ लोग धर्म को राजनीति का टूल बनाने की कोशिश करते हैं।

सवाल: बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध करने वाली जमात चुनाव हार गई। क्या उनकी राजनीति लोगों को पसंद नहीं आई? जवाब: बांग्लादेश का जन्म लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ हुआ था। हम पाकिस्तान से अलग इसलिए हुए थे क्योंकि तब ईस्ट पाकिस्तान के लोगों को लगा कि पाकिस्तान के लोकतंत्र में उनके लिए जगह नहीं है। हमने आजादी की लड़ाई में हजारों लोगों का खून दिया है। बांग्लादेश के लोगों ने हमेशा सही का साथ दिया है। बांग्लादेश के लोगों ने लोकतंत्र के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। इसलिए लोकतंत्र की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है।

सवाल: बांग्लादेश में चुनाव के साथ रेफरेंडम भी हुआ है। संविधान में बदलाव के पक्ष में वोट डाले गए। नई सरकार इसे कैसे आगे ले जाएगी? जवाब: BNP ने रेफरेंडम पर साइन किए हैं। हम धीरे-धीरे इसे लागू करेंगे। विचार ये था कि ऐसे बदलाव किए जाएं कि बांग्लादेश में फिर कभी तानाशाही न आए।

सवाल: चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय से सिर्फ 3 सांसद चुनकर आए हैं। 10% आबादी के लिए सिर्फ 3 सीटें? जवाब: बांग्लादेश में रिजर्व सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए हैं। अल्पसंख्यकों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है। हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल नहीं करते। हमारी पहचान धर्म नहीं बल्कि बांग्लादेश की नागरिकता है। मैं माइनॉरिटी शब्द को गरीब लोगों के लिए इस्तेमाल करना पसंद करूंगा।

सवाल: आप नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के काफी करीब हैं, उनकी खूबियां क्या हैं? जवाब: वे काफी खुले विचारों के हैं। दूसरे लोगों को सुनना पसंद करते हैं। नए विचारों के लिए खुली सोच रखते हैं। उनकी उम्र करीब 60 साल है, लेकिन उन्हें देखकर नहीं लगता। कई लोग उन्हें युवाओं का लीडर भी कहते हैं।

सवाल: तारिक रहमान के बारे में कोई वाकया बताइए, जिससे उनकी शख्सियत के बारे में पता चले? जवाब: तारिक रहमान का तरीका ट्रेडिशनल नहीं है। उसमें नयापन है। एक बार वे रैली में बोल रहे थे, तभी भीड़ में से एक शख्स को बुलाया और सभी के सामने उससे बात की। ये उनकी स्टाइल है। लोगों को ये पसंद आ रही है।

सवाल: लोग बांग्लादेश की नई सरकार से क्या चाहते हैं? जवाब: सरकार गरीबों को सपोर्ट करने के लिए होती है। अमीर लोग सरकार से कुछ नहीं चाहते। वे खुद अपना ख्याल रख सकते हैं। ये सिर्फ हमारे देश की बात नहीं है, बल्कि आपके देश में भी यही होता है। लोग सरकार से अच्छा हेल्थ और एजुकेशन सिस्टम चाहते हैं।

सवाल: अमेरिका में ट्रम्प सरकार आने के बाद पूरी दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है। अमेरिका, चीन, यूरोप, पाकिस्तान, भारत के बीच बांग्लादेश कैसे तालमेल बैठाएगा? जवाब: बांग्लादेश सभी के साथ दोस्ती चाहता है। ट्रम्प ने ट्रेड को बहुत तवज्जो दी है। भारत-बांग्लादेश के बीच भी ट्रेड अहम मुद्दा है। ट्रेड छोटे देश को दबाने का टूल बन जाता है, तो दिक्कत होती है। अमीर देशों को इससे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन गरीब देशों को परेशानी होती है।

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अमीर देशों को खुद को प्रायोरिटी पर नहीं रखना चाहिए, बल्कि दुनिया के बारे में सोचना चाहिए। हम सिर्फ किसी एक देश के नागरिक नहीं हैं, बल्कि ग्लोबल सिटीजन हैं।

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सवाल: सार्क बहुत वक्त से काम नहीं कर रहा है। क्या आप सार्क को फिर से एक्टिव करने की कोशिश करेंगे? जवाब: हमने साउथ एशिया के लिए ही सार्क बनाया था। इसे एक्टिव करेंगे। हम क्षेत्रीय तौर पर एकजुट रहेंगे, तो दुनिया पर ज्यादा असर डाल पाएंगे। क्षेत्रीय एकजुटता से दुनिया के कई देशों ने मजबूत मंच तैयार किए हैं और दूसरे देशों को चुनौती दी है। अगर सार्क अच्छे से काम करता, तो ये दिक्कत शुरू ही नहीं होती।

…………………………… बांग्लादेश से ये रिपोर्ट भी पढ़िए अवामी लीग-हिंदुओं के वोट BNP को मिले, हसीना की सरकार गिराने वाले हारे

बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए चुनाव में BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठबंधन ने 299 में से 212 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की जरूरत थी। कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन को सिर्फ 77 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। पार्टी सिर्फ 6 सीटें जीत पाई है। पढ़िए पूरी खबर…



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