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India first female boxer Pooja Bohra won 10 senior national championships interview In Bhiwani Haryana | भिवानी की बॉक्सर पूजा बोहरा रिकॉर्ड 10वीं बार नेशनल चैंपियन: पिता से छिपकर प्रैक्टिस, हाथ जले, कंधा टूटा, फिर शादी हुई; हर बार कमबैक किया – Bhiwani News

बॉक्सर पूजा बोहरा रिकॉर्ड 10वीं बार चैंपियन बनी हैं।

हरियाणा के भिवानी की पूजा बोहरा नेशनल लेवल पर सीनियर कैटेगरी में 10 खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बन गई हैं। पहले भिवानी की ही कविता चहल के नाम यह रिकॉर्ड रहा। उन्होंने 9 बार नेशनल खिताब जीते।

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ग्रेटर नोएडा में 10 जनवरी को समाप्त हुई 9वीं एलीट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप- 2025 में पूजा ने 75-80 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में रोहतक की नैना को 5-0 से हराया। नैना यूथ चैंपियन रही हैं। प्रतियोगिता के बाद मंगलवार को भिवानी लौटी पूजा का जोरदार स्वागत हुआ।

पूजा का यहां का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। शुरुआत में परिवार से छिपकर बॉक्सिंग प्रैक्टिस की। फिर दिवाली पर हाथ में पटाखा फट गया। हाथ जल गए। उसके बाद कंधे में चोट लगी। यही नहीं, पूजा शादी के बाद फिर रिंग में लौटीं। हर बार कमबैक किया। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में पूजा ने अपने 17 साल के सफर के अनुभव साझा किए।

दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए बॉक्सर पूजा बोहरा।

दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए बॉक्सर पूजा बोहरा।

अब पढ़िए….कैसे परिवार-समाज का विरोध झेला

  • पिता को बॉक्सिंग पसंद नहीं थी: पूजा के पिता राजबीर सिंह बोहरा पुलिस में थे। मां दमयंती घरेलू महिला हैं। पूजा ने 2009 में स्पोर्ट्स शुरू किया। उस समय परिवार भी इतना जागरूक नहीं था। आसपास के लोग भी लड़कियों के खेल को सहजता से नहीं लेते थे। पिता को बॉक्सिंग गेम ही पसंद नहीं था। मां को भी लगता था बेटी बॉक्सिंग करेगी तो कहीं उसे चोट ने लग जाए।
  • कोच की पत्नी ने पहचाना हुनर: पूजा ने पहले इंटर कॉलेज तक बॉस्केटबॉल खेली, कुछ और भी खेल आजमाए। इसी दौरान आदर्श गर्ल्स कॉलेज में कोच संजय श्योराण की पत्नी मुकेश श्योराण को लगा कि यह लड़की तो बॉक्सिंग में अच्छा कर सकती है। बस ग्लब्स मिले और बॉक्सिंग शुरू हो गई।
  • एक साल तक घर नहीं बताया: एक साल तक पूजा ने बॉक्सिंग को लेकर घर में ज्यादा कुछ नहीं बताया। पूजा की आंख के ऊपर चोट लग गई, काफी खून बहा। पूजा को लगा कि घर गई तो पक्का उसका गेम छुड़वा देंगे। इसके बाद कोच के घर पर ही तीन-चार दिन रही। कोच की पत्नी ने मां से बात की कि कोच साहब घर पर नहीं हैं, पूजा को अपने पास ही रख रही हूं दो-तीन दिन के लिए। जब आंख नॉर्मल हो गई तो घर गई।
बॉक्सर पूजा बोहरा घर लौटने पर अपनी मां के गले लगते हुए।

बॉक्सर पूजा बोहरा घर लौटने पर अपनी मां के गले लगते हुए।

पिता को पता चला तो साफ कह दिया- कल से बॉक्सिंग बंद पूजा ने बताया कि शुरुआत में पापा को नहीं पता था कि मैंने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू कर दी। जब पता चला तो साफ मना कर दिया-कल से बॉक्सिंग में नहीं जाएगी। गेम करना है तो कोई और कर ले। फिर कोच ने पापा को मिलने बुलाया। कोच ने समझाया कि लड़की के पंच में दम है, ये कामयाब हो सकती है। तब पिता कुछ राजी हुए।

दिवाली पर हाथ में पटाखा फटा, लगा करियर खतरे में पड़ गया 2016 में दिवाली पर पूजा के हाथ में ही पटाखा फट गया। हाथ झुलस गए। उस दौरान नेशनल चैंपियनशिप होनी थी। जिसमें पूजा खेल नहीं पाई। उसके बाद रेस्ट के कारण पूजा के कंधे में भी इंजरी हो गई। यहीं से पूजा का स्ट्रगल स्टार्ट हुआ। तब लगा कि पूजा अब खेल नहीं पाएगी। इंजरी से उभरने में डेढ़ साल लग गया। उसने फिर कमबैक किया।

शादी के बाद रिंग में लौटीं, टॉप लेवल बॉक्सिंग में आसान नहीं होता फरवरी 2023 में पूजा की शादी जींद निवासी आकाश सिंहमार से हुई। पति का कोई स्पोर्ट्स बैकग्राउंड नहीं है। तब भी खेल जगत को लगा कि अब पूजा रिंग में नहीं लौटेंगी। शादी के कुछ महीने बाद ही पूजा ने कम बैक किया। और दिसंबर 2023 में नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीता।

पूजा कहती हैं- आपका एक अच्छा प्लेयर होना ही मायने नहीं रखता। आपका स्पोर्ट सिस्टम कैसा है, वह भी काफी मायने रखता है। इसमें सास सरला देवी और पति ने उनका पूरा सहयोग किया।

गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर पूजा बोहरा का भिवानी पहुंचने पर स्वागत करते हुए परिजन।

गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर पूजा बोहरा का भिवानी पहुंचने पर स्वागत करते हुए परिजन।

दैनिक भास्कर एप से बातचीत में पूजा ने कहीं ये 4 अहम बातें…

  • महसूस करो कि हमसे अच्छा कोई नहींः कोच संजय श्योराण काफी अच्छी टेक्नीक सिखाते हैं। वे माइंड भी ऐसा बना देते हैं कि हमें यह लगता है कि हमसे अच्छा कोई नहीं है। स्टार्टिंग में भी ऐसा ही था कि मुझे एक साल में ही यूं लगने लग गया था कि मेरे से अच्छा कोई नहीं है। लेकिन धीरे-धीरे रियल बॉक्सिंग को फेस किया तब लगा कि लगातार मेहनत की जरूरत है।
  • मेडल आने लगे तो सबका नजरिया बदलाः स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अच्छे दिनों की शुरुआत हुई। लोगों का नजरिया भी बदलने लगा। सीनियर नेशनल में शुरुआत के एक साल मेडल नहीं जीत पाई। इसके बाद धीरे-धीरे मेडल आने स्टार्ट हो गए।
  • फैमिली का सपोर्ट है तो हर लड़ाई आसानः फैमिली सपोर्ट कर रही हो तो बाकी कुछ मैटर नहीं करता। शुरुआत में परिवार को लगता था, बॉक्सिंग खेल खतरनाक है। कहीं चोट ना लग जाए। लेकिन बाद में बहुत सपोर्ट मिला। जब कभी 17 साल के सफर को देखती हूं तो लगता है कि खिलाड़ी के लिए सबसे मुश्किल टाइम वह होता है, जब वह करना चाहता है और कर नहीं पा रहा। जैसे कोई इंजरी हो जाए।
  • जो ठान लो, उसे करके दिखाओः जो लड़की खिलाड़ी बनना चाहती हैं, उनको के लिए बस यही राय है कि जो ठान लो, उसे करके दिखाओ। आजकल परिवार काफी जागरूक हो चुके हैं। यह देखना चाहिए कि कौन कोच अच्छे हैं और कौन-सी एकेडमी अच्छी है। यह अच्छे से निर्णय लेकर ही अपना गेम स्टार्ट करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित चैंपियनशिप में जीतने के बाद पूजा रानी विनिंग पोज देते हुए- फाइल फोटो।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित चैंपियनशिप में जीतने के बाद पूजा रानी विनिंग पोज देते हुए- फाइल फोटो।

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