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LPG Crisis: भारत आ रहे शिवालिक और नंदादेवी शिप, 13 दिन की LPG का हो गया इंतजाम, देश के लिए गुड न्यूज


ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग में बंद पड़े होर्मुज स्ट्रेट से भारत अपने दो जहाजों शिवालिक और नंदादेवी को निकालने में सफल रहा है. इन दोनों ही जहाजों पर एलपीजी गैस लदी हुई है, लेकिन सवाल है कि क्या इन दो जहाजों पर लदी एलपीजी भारत पहुंच गई तो भारत में एलपीजी का संकट कुछ दिनों के लिए खत्म हो जाएगा. क्या इन दोनों ही जहाजों पर इतना एलपीजी है कि भारत अगले कुछ दिनों तक एलपीजी संकट का सामना कर सकता है या फिर इन जहाजों पर लदी एलपीजी से फौरी तौर पर भी कोई राहत मिलने वाली नहीं है. आखिर क्या है शिवालिक और नंदादेवी पर लदी एलपीजी का सच, आज बात करेंगे विस्तार से.

दरअसल भारतीय झंडे लगे शिवालिक और नंदा देवी को ईरान ने 14 मार्च को ही होर्मुज ऑफ स्ट्रेट से निकलने की इजाजत दी थी. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलकर ये दोनों ही जहाज भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें से एक जहाज शिवालिक भारत के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच रहा है और दूसरा नंदादेवी भारत के कांडला पोर्ट पर डॉक हो रहा है. मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट, शिपिंग एंड वाटरवेज के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार के मुताबिक इन दोनों ही जहाजों पर कुल मिलाकर 92,700 मिट्रिक टन गैस लदी हुई है.

इनमें भी शिवालिक पर करीब 45 हजार मिट्रिक टन गैस है, वहीं नंदादेवी पर 47,700 मिट्रिक टन गैस लदी हुई है. जबकि भारत में हर रोज एलपीजी की खपत करीब 8 हजार मिट्रिक टन की है. और इस लिहाज से अगर दोनों ही जहाजों की गैस को खपत के हिसाब से देखें तो ये गैस करीब 13 दिन के लिए काफी है. 

बाकी मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट, शिपिंग एंड वाटरवेज के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार के मुताबिक फारस की खाड़ी में अब भी भारत के झंडे लगे कुल 22 जहाज रुके हुए हैं. ये अब भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर नहीं निकल पाए हैं. तो इन दो जहाजों की गैस से तो कुछ खास होना नहीं है.

हां इतना जरूर है कि भारत में प्रोडक्शन 28 फीसदी तक बढ़ा है तो वो पुराने प्रोडक्शन 1.158 मिलियन टन प्रति माह से बढ़कर करीब 1.5 मिलियन टन प्रति माह हो गया है. और इसकी वजह से भारत खुद भी इतनी गैस प्रोड्यूस करने लगा है कि 15 दिन का काम तो आराम से चल सकता है. बाकी जिस तरह से ईरान ने अभी दो जहाजों को होर्मुज से निकलने दिया है, अगर ऐसे ही भारतीय जहाजों को ईरान रास्ता देने पर राजी हो जाए तो कुछ ही दिनों में भारत की गैस सप्लाई पहले की तरह बहाल हो जाएगी और फिर सारी मुसीबत भी खत्म हो जाएगी.

भारत में एलपीजी खपत का हिसाब-किताब 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीत 30 सालों में भारत में रसोई गैस (LPG) का सालाना इस्तेमाल 6 गुना बढ़ गया है. जहाँ 1998-99 में इसकी खपत सिर्फ 446 हज़ार मीट्रिक टन थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 2,754 हज़ार मीट्रिक टन तक पहुँच गई है. यानी अगर इस आंकड़े को रोजाना में बदले तो ये आंकड़ा 7500 टन प्रति दिन हो जाता है. भारत में शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में एलपीजी की खपत कम है. 

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