मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है. ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके बड़े तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है. इससे पूरे क्षेत्र में डर और तनाव बढ़ गया है. यह सब तब शुरू हुआ जब इजरायल ने ईरान के साउथ पर्स गैस फील्ड पर हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने कतर के गैस ठिकानों को निशाना बनाया. सऊदी अरब ने कहा कि उसने कई मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही रोक दिया, जबकि यूएई में एक गैस फील्ड को मलबा गिरने के कारण खाली कराना पड़ा.
अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर सीधा हमला हुआ तो वह भी खुलकर इस जंग में उतर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होना पड़ सकता है, क्योंकि सऊदी और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता है.
पाकिस्तान से सैन्य मदद मांग सकता है सऊदी
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सऊदी अरब पूरी ताकत के साथ जंग में उतरता है तो वह पाकिस्तान से सैन्य मदद मांग सकता है. इसमें न्यूक्लियर सुरक्षा यानी परमाणु सुरक्षा का जिक्र भी किया गया है. इसका मतलब यह है कि एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जा सकता है. हाल के समय में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसीम मुनीर कई बार सऊदी अरब का दौरा कर चुके हैं. इससे साफ होता है कि इस जंग के बीच अंदर ही अंदर नई रणनीति बन रही है.
पाकिस्तान की एंट्री से बढ़ेगी जंग
पाकिस्तान की स्थिति भी आसान नहीं है. एक तरफ वह सऊदी अरब का करीबी साथी है तो दूसरी तरफ उसकी ऊर्जा जरूरतें भी खाड़ी देशों पर निर्भर हैं. इसके साथ ही वह ईरान के साथ गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है. अगर यह जंग और बढ़ती है और सऊदी अरब सीधे इसमें उतरता है तो यह संघर्ष सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा. पाकिस्तान की एंट्री से यह और बड़ा हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.


