HomeIndiaNCERT का विवादित चैप्टर लिखने वाले तीनों शिक्षाविद पहुंचे SC, जानें CJI...

NCERT का विवादित चैप्टर लिखने वाले तीनों शिक्षाविद पहुंचे SC, जानें CJI से क्या बोले?


कक्षा 8 की एनसीईआरटी की किताब में ज्यूडिशियरी पर विवादित चैप्टर लिखने वाले ब्लैक्लिस्टेड शिक्षाविदों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. कोर्ट को बताया गया कि चैप्टर लिखने वाले एक शिक्षाविद खुद वकील रह चुके हैं और कई बार सुप्रीम कोर्ट में भी पेश हुए हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कोर्ट की तरफ से की गई सख्त टिप्पणियों की वजह से उन्हें पूर्वाग्रह हुआ है इसलिए उन्होंने अपना रुख स्पष्ट करने के लिए याचिका दाखिल की.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ पर लिखे गए चैप्टर पर स्वत: संज्ञान लिया था. कोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘या तो तीनों शिक्षा विशेषज्ञों को भारतीय न्यायपालिका के बारे में पूरी जानकारी नहीं है या फिर उन्होंने जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया ताकि कक्षा 8 के बच्चों के सामने भारतीय न्यायपालिका की गलत छवि पेश की जा सके.’

चैप्टर लिखने वाले शिक्षा विशेषज्ञों माइकल दालिनो, सुपर्णा दीवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने उन्हें किसी भी शिक्षा बोर्ड में काम न देने का निर्देश दिया था. सोमवार (6 अप्रैल, 2026) को सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने तीनों शिक्षाविदों के वकीलों ने उनकी याचिकाएं पेश कीं.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत ने उनसे पूछा, ‘आपने जो किया है क्या आप उसका बचाव कर रहे हैं?’ माइकल दालिनो के लिए सीनियर एडवोकेट अरविंद दतार, सुपर्णा दीवाकर के लिए सीनियर एडवोकेट जे साई दीपक और आलोक प्रसन्ना के लिए सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए. गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट में कहा, ‘हम संदर्भ देते हुए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लागू नई शिक्षण पद्धति, जिसमें अन्य मुद्दे भी शामिल हैं, आपके सामने पेश कर रहे हैं. कक्षा 6 और 7 की टेक्सटबुक्स में विधायिका, कार्यपालिका और चुनाव आयोग के सामने आने वाले मुद्दों के बारे में बताया गया है.’

उन्होंने कहा कि इस मामले में कहा गया कि सिर्फ न्यायपालिका को ही निशाना बनाया गया. अन्य संस्थानों को प्रभावित करने वाले उन मुद्दों को भी सुना जा चुका है. उन्होंने बेंच से कहा, ‘हम आपको प्रक्रिया दिखाना चाहते हैं. हम आपको पूरी प्रक्रिया बताना चाहते हैं. ये रातों-रात मशहूर होने वाले लोग नहीं हैं, ये उच्च कोटि के विद्वान लोग हैं और इनकी बहुत साख है. आलोक प्रसन्ना तो खुद वकील रह चुके हैं और कई बार इस अदालत में भी पेश हो चुके हैं.’

एडवोकेट जे साई दीपक ने कहा कि सार ये है कि यह एक सामूहिक प्रक्रिया थी, जिसमें कोई एक व्यक्ति अकेले फैसला लेने का हकदार नहीं था. उनकी दलीलें सुनने के बाद कोर्ट सुनवाई के लिए सहमत हो गया और मामले को लिस्ट करने का निर्देश दिया.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि न्यायपालिका पर लिखे गए नए चैप्टर की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा, सीनियर एडवोकेट के के वेणुगोपाल और गढ़वाल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रकाश सिंह की कमेटी बनाई गई है. यह कमेटी कोर्ट के आदेश के मुताबिक नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल के साथ मिल कर काम करेगी.

 

यह भी पढ़ें:-
नेगेटिव CIBIL स्कोर से परेशान था शख्स, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और तुरंत दूर हो गई उलझन, जानें कैसे



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments